बिहार का लाल, जिसने धोया क्रांति का कलंक; जानें बैकुंठ शुक्ल के बलिदान की पूरी कहानी
भगत सिंह की शहादत का बदला लेने वाले महान क्रांतिकारी बैकुंठ शुक्ल की आज पुण्यतिथि है. 1934 में आज ही के दिन उन्हें गया जेल में फांसी दी गई थी. उन्होंने गद्दार फणींद्र नाथ घोष को मारकर क्रांतिकारी आंदोलन की गरिमा बचाई थी.
‘फॉरगॉटन कश्मीर’: इतिहास, सियासत और सिसकियां; एंबेसेडर श्रीवास्तव की पुस्तक ने खोली पाकिस्तान की पोल
पूर्व राजदूत डी.पी.के. श्रीवास्तव की पुस्तक 'फॉरगॉटन कश्मीर' पाकिस्तान नियंत्रित कश्मीर (PoK) के राजनीतिक और सामाजिक जीवन का एक आईना है. यह किताब कश्मीर के विभाजन के बाद वहां की मानवाधिकार स्थिति, पाकिस्तान के कड़े सैन्य नियंत्रण को उजागर करती है.
बावनी इमली: सिर्फ पेड़ नहीं, बल्कि आजादी का गवाह; जानें 52 गुमनाम नायकों के बलिदान की ये कहानी
28 अप्रैल 1858 को फतेहपुर के 'बावनी इमली' पेड़ पर ठाकुर जोधा सिंह अटैया समेत 52 क्रांतिकारियों को अंग्रेजों ने फांसी दी थी. इस ऐतिहासिक और उपेक्षित शौर्य गाथा को लेखक भगवंत अनमोल ने अपने उपन्यास 'बावनी इमली' में जीवंत किया है.
इतिहास के पन्नों से बाहर आईं ‘पादशाह बेगम’: राजीव कुमार के उपन्यास में जीवंत हुई जहांआरा की शक्ति और संवेदना
राजीव कुमार का उपन्यास 'जहांआरा: पादशाह बेगम' मुगल शहजादी जहांआरा के त्याग, विद्वत्ता और राजनीतिक कौशल की कहानी है। यह किताब चांदनी चौक की वास्तुकार और सूफी मत की अनुयायी जहांआरा के व्यक्तित्व को एक नए नारीवादी दृष्टिकोण से पेश करती है.
मोबाइल के शोर के बीच किताबों में सुकून तलाशता मन, पढ़िए.. सुधा और चंदर के बदलते रूप की दास्तां
Gunahon Ka Devta LITERATURE BLOG: स्मार्टफोन के युग में किताबों से जुड़कर कैसा रहा 'गुनाहों का देवता' और 'मुसाफिर कैफ़े' तक का सफर? पढ़िए प्रेम और बदलते रिश्तों पर मेरा विशेष अनुभव.
पृथ्वी दिवस विशेष: 4.6 अरब साल का सफर और एक ‘सेकंड’ का इंसान; चखिए विज्ञान और इतिहास का अनोखा संगम
आज पृथ्वी दिवस के मौके पर हम चर्चा कर रहे हैं हार्वर्ड प्रोफेसर एंड्रयू एच. नोल की प्रसिद्ध पुस्तक 'पृथ्वी का संक्षिप्त इतिहास' (मंजुल प्रकाशन) की. यह किताब हमारे नीले ग्रह के 4.6 अरब वर्षों के उतार-चढ़ाव भरे सफर को महज कुछ पन्नों में समेटती है.
व्यंजन नहीं, संस्कृति का आईना: ‘इतिहास की थाली’ के बहाने समझें अपनी जीवंत विरासत को सहेजने की जरूरत
अनिमेष मुखर्जी की नई पुस्तक 'इतिहास की थाली' भोजन के माध्यम से भारत के सदियों पुराने इतिहास, व्यापार और सांस्कृतिक बदलावों को परत-दर-परत खोलती है. चाय के वैश्विक सफर से लेकर आलू-टमाटर के 'विदेशी' होने तक, ये किताब हमारी थाली का हर निवाला सत्ता, राजनीति और उपनिवेशवाद की गवाही देता है.
8 अप्रैल 1974: जब पटना की सड़कों पर उतरी थी ‘मौन क्रांति’: जेपी की जीवनी में कैद है लोकतंत्र की आजादी की गाथा
8 अप्रैल 1974 का दिन भारतीय राजनीति में अहिंसक संकल्प का प्रतीक है. सुप्रसिद्ध इतिहासकार बिमल प्रसाद और सुजाता प्रसाद की पुस्तक 'क्रांति का सपना' (वाणी प्रकाशन) जेपी के उस मौन जुलूस की याद दिलाती है.
विवेक अग्निहोत्री की ‘रक्तबोध’ ने हिलाया बंगाल का इतिहास; विभाजन के खूनी पन्नों की दास्तां, जिन्हें किताबों से मिटा दिया गया
क्या बंगाल का इतिहास केवल 'सांस्कृतिक पुनर्जागरण' तक सीमित है? विवेक रंजन अग्निहोत्री की नई किताब 'रक्तबोध' उन कड़वे सत्यों को सामने लाती है, जिन्हें दशकों तक सेक्युलर राजनीति और औपनिवेशिक इतिहासकारों ने दबाए रखा.
क्या जिज्ञासा की कमी बनी भारतीय सभ्यता के पतन की वजह? यूपीएससी सचिव शशि रंजन कुमार की पुस्तक में छिपे हैं इतिहास के 5 बड़े सबक
Indian Civilization - The Zenith & Decline: आईआईटी दिल्ली के स्नातक और यूपीएससी सचिव शशि रंजन कुमार की नई पुस्तक भारतीय सभ्यता के स्वर्णिम काल से लेकर उसके संघर्षों तक का एक निष्पक्ष विश्लेषण पेश करती है.







