Bharat Express DD Free Dish

BrahMos missile

INS Himgiri: 31 जुलाई को GRSE ने भारतीय नौसेना को अत्याधुनिक युद्धपोत 'हिमगिरी' सौंपा, जो प्रोजेक्ट 17A के तहत बना पहला फ्रिगेट है. ब्रह्मोस और बराक-8 मिसाइलों से लैस यह स्वदेशी युद्धपोत नौसेना की ताकत और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ी छलांग है.

ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीकों की ताकत दिखाई है. हमारे ड्रोन, ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलों से आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए, जो 'मेक इन इंडिया' की सफलता का प्रतीक है.

'मेक इन इंडिया' पहल ने भारत को रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाते हुए वैश्विक मंच पर मजबूत उपस्थिति दिलाई है. पूर्व नौसेना अधिकारी बिस्वजीत नायक ने इसे युवाओं और उद्योग के लिए नया अवसर बताया.

भारत ने पाकिस्तान में घुसकर सटीक मिसाइल हमले करके अपनी सैन्य श्रेष्ठता साबित की है. भारत ने उसके अहम एयरबेस को निशाना बनाया. सैन्य इतिहासकार ने इसे भारत की स्पष्ट जीत बताते हुए कहा कि पाकिस्तान के पास जवाबी कार्रवाई की क्षमता नहीं थी. पाकिस्तान की जमीं से फलते-फूलते आतंकवाद को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर' के साथ जवाब दिया है. और इस जवाब को शानदार और जोरदार आवाज देने में मदद की है भारत की ब्रह्मोस मिसाइल ने.

'ऑपरेशन सिंदूर' में मेड इन इंडिया हथियारों की ताकत दिखी. ब्रह्मोस मिसाइल से आतंकी ठिकानों को तबाह कर भारत ने अपनी सैन्य क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन किया.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह डिजिटल माध्यम से दिल्ली से इस समारोह में शामिल हुए और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर इस परियोजना का उद्घाटन किया.

लखनऊ में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल उत्पादन यूनिट का उद्घाटन कर दिया है. इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत कई नेता मौजूद रहे.

लखनऊ में 11 मई 2025 को ब्रह्मोस मिसाइल की उत्पादन यूनिट का शुभारंभ होगा. उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर के तहत यह कदम रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा और सामरिक शक्ति बढ़ाएगा.

भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल का दूसरा बैच भेजा. ब्रह्मोस मिसाइल भारत के रक्षा निर्यात की सफलता की प्रतीक बन चुका है, जिससे भारत की वैश्विक रक्षा स्थिति मजबूत हो रही है.

Public-Private Partnership: भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए टियर-1 प्रणालियों, R&D और निजी-पब्लिक साझेदारी पर ध्यान केंद्रित करना होगा, जिससे वैश्विक नेतृत्व की दिशा में कदम बढ़ाया जा सके.