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वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगले पांच वर्षों में तकनीकी नौकरियों का विकास सबसे तेज होगा, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी तकनीकी क्षमताएं सबसे ज्यादा मांग में होंगी.

भारत में म्यूचुअल फंड्स निवेशकों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं, खासतौर पर सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्स (SIPs) के जरिए निवेश करने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है.

भारतीय शेयर बाजार में लगातार 10वें साल बढ़त की संभावना है, जो आर्थिक सुधार और मजबूत कॉर्पोरेट आय से प्रेरित होगी. Citigroup और Morgan Stanley ने भारतीय बाजार में डबल-डिजिट रिटर्न की उम्मीद जताई है.

दिसंबर में भारत के सेवा क्षेत्र ने चार महीने का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया, नए ऑर्डरों में वृद्धि और मांग की मजबूती से विकास हुआ, जबकि महंगाई में कमी दर्ज की गई.

जन औषधि केंद्रों के माध्यम से दवाओं की बिक्री 1,255 करोड़ रुपये से पार हो गई है, जिससे नागरिकों को लगभग 5,020 करोड़ रुपये की बचत हुई है. यह जन औषधि योजना की सफलता का परिणाम है, जिसका उद्देश्य सस्ती दवाएं उपलब्ध कराना है.

भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती दिखा रही है, चालू वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही में उच्च-आवृत्ति संकेतक तेजी से विकास की ओर इशारा कर रहे हैं. जीएसटी कलेक्शन, सेवा क्षेत्र पीएमआई, हवाई यात्री यातायात, और वाहन पंजीकरण में सुधार हुआ है.

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि मौजूदा स्थिति बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में महंगाई दर और घट सकती है.

वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम ने नई ऊंचाइयां छुईं. निजी बैंकों की भागीदारी ने इसे मजबूती दी, जबकि NBFCs ने भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान दिया.

म्यूचुअल फंड्स ने 2024 में इक्विटी बाजार में रिकॉर्ड तोड़ निवेश किया, जो 4 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया. यह पिछले दो साल के 1.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश से दोगुने से भी अधिक है.

भारत सरकार की PLI योजनाओं से अगले 5-6 वर्षों में 720 कंपनियों द्वारा $459 बिलियन की अतिरिक्त आय उत्पन्न होने की संभावना है. यह आय आयात में कमी और निर्यात को बढ़ावा देने में मदद करेगी.