तुर्किये से आई है होली की शान गुजिया, ठंडई का क्या है इतिहास, जानें राजपूत और मुगल कैसे मनाते थे होली?
Holi History: इतिहासकारों के मुताबिक गुजिया को भारत में 13वीं शताब्दी में तुर्की के व्यापारी भारत लेकर आए. हालांकि भारत में इसे तुर्की की जगह इसका भारतीय रूप दिया गया. तुर्की के बकलावा में फ्लेकी पेस्ट्री डाला था. जबकि भारत में इसकी जगह ड्राईफ्रूट्स, खोया, घी भरकर तला गया और इसे आधा चांद जैसी शेप दी गई.
Holi 2026: आगरा में 280 रुपये से 2000 रुपये किलो तक गुझिया, पिस्ता नट और बीटरूट फ्लेवर की धूम
होली 2026 के मौके पर आगरा आगरा का गुझिया बाजार खास आकर्षण का केंद्र बन गया है. पारंपरिक मावा गुझिया से लेकर चॉकलेट, ब्लूबेरी और बिस्कॉफ जैसे प्रीमियम फ्लेवर तक दुकानों में रंग-बिरंगी वैरायटी सजाई गई हैं. ग्राहकों की बदलती पसंद को ध्यान में रखते हुए नए फ्लेवर और आकर्षक पैकिंग के साथ मिठाइयां पेश की जा रही हैं.
Holi: ‘बाहुबली गुझिया’ ने इस दुकान पर बढ़ाई भीड़, 50 हजार रु किलो ‘गोल्डन गुझिया’ भी डिमांड में, ‘पटाखों वाले गुलाल’ के साथ होली के रंग में रंगी यूपी
UP News: होली में इस बार अनोखी पिचकारियों व गुलाल से बाजारे पट गई हैं. कहीं गुझिया की तामाम किस्मे हैं तो कहीं पिचकारी व रंगों की. 5 हजार से लेकर 50 हजार तक की है गुझिया की कीमत.





