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Kanwar Yatra 2026

Kanwar Yatra: बुलंदशहर के रामघाट से दो सगे भाई कृष्णा और भूदेव 95 वर्षीय दादाजी हरीशचंद्र को कांवड़ में बैठाकर पैदल वृंदावन के लिए रवाना हुए. अलीगढ़ में उनकी अनोखी कांवड़ यात्रा का श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया और दोनों पोतों की सेवा भावना को कलयुग के श्रवण कुमार की मिसाल बताया.

सावन के पवित्र महीने में हरिद्वार से गुरुग्राम के लिए निकली एक भव्य कांवड़ यात्रा लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. करीब 15 से 16 लाख रुपये की लागत से तैयार इस कांवड़ में शिव-पार्वती की सुंदर झांकी सजाई गई है, जिसके साथ 30 शिवभक्तों का जत्था पैदल सफर कर रहा है.

Kanwar Yatra Rules: मुजफ्फरनगर में प्रवेश कर रही बड़ी डीजे कांवड़ों की पुरकाजी बॉर्डर पर जांच की जा रही है। प्रशासन ने तय आकार के नियम लागू किए हैं. 10 फीट ऊंचाई और 12 फीट चौड़ाई से अधिक डीजे कांवड़ों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही, उल्लंघन पर चालान की कार्रवाई हो रही है.

सावन के पावन महीने में कांवड़ यात्रा के दौरान मुजफ्फरनगर में एक महिला कांवड़िया ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया. पुलिस की मदद से उसे अस्पताल पहुंचाया गया जहां एसएसपी ने पहुंचकर बच्चों का नामकरण किया.

Sawan 2026: सावन 2026 की कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि पर समाप्त होगी. 3 अगस्त को पहला सावन सोमवार है.

श्रावण मास की कांवड़ यात्रा के दौरान मध्य प्रदेश के मुरैना से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है. यहाँ के कुआंपुर गांव के 150 से अधिक लोग एक परिवार की तरह 800 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पर निकले हैं.

राजस्थान में कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस प्रशासन ने कड़े नियम लागू किए हैं. अब यात्रा के दौरान त्रिशूल, हॉकी या कोई भी नुकीली वस्तु ले जाने की अनुमति नहीं होगी.

राजस्थान पुलिस ने कांवड़ यात्रा-2026 के लिए सख्त SOP जारी की है. हथियार, नशा, तेज डीजे और बिना अनुमति वाहनों पर रोक रहेगी. कांवड़ियों के लिए पहचान पत्र अनिवार्य किया गया है.

सावन के महीने में निकलने वाली कांवड़ यात्रा उत्तर भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव लाती है. इस एक महीने के दौरान छोटे दुकानदारों, ढाबा संचालकों और परिवहन सेक्टर को मिलाकर लगभग 1,000 करोड़ रुपये का व्यापार होता है.

सावन महीने की शुरुआत के साथ ही मुजफ्फरनगर से एक दिल को छू लेने वाली तस्वीर सामने आई है. लोक गायिका काजल चौधरी अपनी 90 साल की सासू मां को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली की यात्रा कर रही हैं, जो आधुनिक युग में श्रवण कुमार की याद ताजा कर रही है.