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Mahashivratri

Mahashivratri 2025: आज महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर देश के प्रमुख शिव मंदिरों में भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. सोमनाथ, केदारनाथ, ओंकारेश्वर जैसे 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक का दौर जारी है.

महाशिवरात्रि पर ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र का जाप अत्यंत लाभकारी माना जाता है. यह पंचतत्वों का प्रतीक है और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग दिखाता है. इसका नियमित जाप जीवन में सुख-समृद्धि लाता है.

महाशिवरात्रि पर शिव भक्त जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर महादेव की कृपा प्राप्त करते हैं. उत्तर प्रदेश में भी ऐसे प्रसिद्ध शिव मंदिर हैं जिनमें जलाभिषेक और दर्शन से भक्तों को आध्यात्मिक सुख और शिव आशीर्वाद प्राप्त होता है.

महाकुंभ 2025 का समापन महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अंतिम पूजन के साथ होगा. जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि ने इसे सनातन संस्कृति और सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया.

महाशिवरात्रि की पूजा के लिए जरूरी साम्रगी सही जाप के साथ जानें औघड़दानी को प्रसन्न करने के वो सभी उपाय...

महाशिवरात्रि स्नान पर्व पर प्रयागराज में नो-व्हीकल जोन लागू होगा. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाटों पर विशेष व्यवस्था की गई है. आवश्यक सेवाओं को छूट दी गई है, भीड़ प्रबंधन कड़ा रहेगा.

प्रयागराज महाकुंभ 2025 में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा, जहां हिमाचल के मुख्यमंत्री, ओडिशा के राज्यपाल, ईशा अंबानी और रवीना टंडन सहित कई गणमान्य लोगों ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई.

देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम को कामनालिंग और हृदयापीठ कहा जाता है, जहां महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा होती है. यहां शिव-पार्वती का गठबंधन होता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

महाशिवरात्रि भगवान शिव का प्रमुख पर्व है, जिसे फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है. इस दिन 12 ज्योतिर्लिंगों की पूजा का विशेष महत्व है, जिससे भक्तों को शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

Kashi Vishwanath Temple: महाशिवरात्रि के दौरान तकरीबन 15 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने के लिए पहुंचने की संभावना है. ऐसे में भारी भीड़ को देखते हुए वीआईपी एंट्री पर बैन लगा दिया गया है.