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mann ki baat

पीएम मोदी (PM Modi) ने ‘मन की बात’ के 131वें एपिसोड में कहा कि भारत गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़कर अपनी संस्कृति को महत्व दे रहा है. उन्होंने राष्ट्रपति भवन में 23 फरवरी को ‘राजाजी उत्सव’ मनाने की घोषणा की और देशवासियों से त्योहारों में स्वदेशी उत्पाद अपनाने की अपील की.

पीएम मोदी (PM Modi) ने ‘मन की बात’ के 131वें एपिसोड में ऑर्गन डोनेशन की प्रेरक कहानियां साझा कीं. उन्होंने केरल की 10 माह की बच्ची आलिन शेरिन अब्राहम का उल्लेख किया, जिसके माता-पिता ने अंगदान कर कई लोगों की जिंदगी बचाई.

पीएम मोदी (PM Modi) ने ‘मन की बात’ के 131वें एपिसोड में किसानों की बदलती सोच और नवाचार की प्रशंसा की. उन्होंने ओडिशा के किसान हिरोद पटेल और केरल के त्रिसूर जिले के उदाहरण साझा किए और बताया कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बन चुका है.

पीएम मोदी (PM Modi) ने ‘मन की बात’ में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट की सराहना की. उन्होंने कहा कि यह आयोजन AI की शक्ति के उपयोग की दिशा में टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. अमूल और संस्कृति से जुड़े AI प्रोडक्ट्स ने वैश्विक नेताओं को प्रभावित किया.

PM Modi Mann Ki Baat: पीएम मोदी आज (रविवार) सुबह 11 बजे अपने लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के जरिए देश और दुनिया के लोगों को संबोधित करेंगे. साल 2026 का यह दूसरा और इस कार्यक्रम का कुल 131वां एपिसोड है.

विश्व रेडियो दिवस पर पीएम मोदी ने रेडियो को सुदूर गांवों और शहरों की 'भरोसेमंद आवाज' बताया. उन्होंने #MannKiBaat के जरिए इस माध्यम की सामाजिक शक्ति को साझा किया और 22 फरवरी के कार्यक्रम के लिए देशवासियों से सुझाव मांगे हैं.

साल 2026 के पहले ‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने श्रीअन्न (मिलेट्स) को सेहत, परंपरा और किसानों की आय से जोड़ते हुए देशभर के नवाचारों की सराहना की है.

पीएम मोदी ने आज अपने मन की बात के 130वें सोपान में अपना संबोधन दिया. इस मौके पर उन्होंने कई मुद्दों पर बात रखी. इसमें से एक ऐसे गांव के बारे में बताया जहां घरों में खाना नहीं बनता है.

प्रधानमंत्री मोदी ने मलेशिया में भारतीय संस्कृति के संरक्षण की प्रशंसा करते हुए कहा कि वहां 500 से अधिक तमिल स्कूल हमारी भाषाई विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने 'मलेशिया इंडिया हेरिटेज सोसायटी' के प्रयासों और हाल ही में आयोजित 'लाल पाड़ साड़ी' आइकॉनिक वॉक का जिक्र किया.

भजन और कीर्तन हमारी संस्कृति की आत्मा हैं. आज की युवा पीढ़ी ने इसे 'भजन क्लबिंग' जैसी नई शैली दी है. बड़े शहरों के आधुनिक मंचों पर जब रोशनी और संगीत के बीच युवा पूरी तन्मयता से भजन गाते हैं, तो वह किसी बड़े कॉन्सर्ट जैसा अनुभव होता है.