Bharat Express DD Free Dish

Patanjali Ayurved

दिल्ली हाईकोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद के 'गोनाइल' ट्रेडमार्क को रद्द करने वाली याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने कहा कि पतंजलि के ब्रांड नाम से उपभोक्ताओं में कोई भ्रम पैदा नहीं होता. विस्तार से पढ़ें कोर्ट का फैसला.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद की याचिका खारिज करते हुए ₹273.5 करोड़ की CGST बकाया वसूली को वैध ठहराया है और अधिकारियों को GST अधिनियम की धारा 122 के तहत पेनाल्टी कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दी है.

बाबा रामदेव की अगुवाई वाली पतंजलि आयुर्वेद, जो आयुर्वेदिक उत्पादों और स्वास्थ्य समाधानों के लिए जानी जाती है, ने अब बीमा क्षेत्र में कदम रखकर सबको चौंका दिया है.

उपभोक्ता वस्तुओं की दिग्गज कंपनी डाबर की ओर से दायर पर दिल्ली हाई कोर्ट ने बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

Bharat Express Uttarakhand Conclave: भारत एक्सप्रेस की ओर से देहरादून में हो रहे ‘नये भारत की बात, उत्तराखंड के साथ’ नामक कॉन्क्लेव में पतंजलि आयुर्वेद के एमडी आर्चाय बालकृष्ण ने विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखे.

भ्रामक विज्ञापनों को लेकर पिछले महीने उच्चतम न्यायालय द्वारा रामदेव और उनकी औषधि कंपनी पतंजलि आयुर्वेद को फटकार लगाए जाने के बाद आईएमए की यह पहली टिप्पणी है.उच्चतम न्यायालय में 30 अप्रैल को मामले की सुनवाई होने वाली है.

पतंजलि भ्रामक विज्ञापन मामले में बीते मंगलवार को शीर्ष अदालत ने कंपनी को निर्देश देते हुए कहा था कि हम अखबारों में प्रकाशित माफीनामे का वास्तविक आकार देखना चाहते हैं. हम यह देखना चाहते हैं कि जब आप कोई विज्ञापन जारी करते हैं, तो इसका मतलब ये नहीं कि हमें इसे माइक्रोस्कोप से देखना होगा.

इस महीने की शुरुआत में भ्रामक विज्ञापन मामले में योगगुरु Baba Ramdev और Patanjali Ayurved के प्रबंध निदेशक Acharya Balkrishna ने व्यक्तिगत रूप से Supreme Court से माफी मांगी थी.

Patanjali tenders unconditional apology: सुप्रीम कोर्ट पतंजलि आयुर्वेद द्वारा जारी एक विज्ञापन से नाराज था, क्योंकि उसने अदालत को आश्वासन दिया था कि वह ‘दवाओं के औषधीय प्रभावों का दावा करने वाले या चिकित्सा की किसी भी प्रणाली के खिलाफ कोई बयान नहीं देगी.

Supreme Court Vs Ramdev: बाबा रामदेव ने शीर्ष अदालत की फटकार के बावजूद उसके कारण बताओ नोटिस का जवाब देना भी जरूरी नहीं समझा है. इससे खफा सुप्रीम कोर्ट ने रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होने का आदेश दिया है.