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sawan 2025

Sawan 2025: आनंदेश्वर मंदिर के भक्त देश विदेश तक फैले हुए हैं. सावन के महीने में दूर दूर से भक्त यहां शिव की पूजा अर्चना करने आते हैं. मान्यता है कि आनंदेश्वर महादेव की पूजा अर्चना करने से भक्तों की मनोकामना पूरी होती है

कुंभ नगरी प्रयागराज में एक ऐसा शिवलिंग है जिसे भृगु ऋषि (Bhrigu Rishi) ने स्थापित किया था. खास बात यह है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस शिवलिंग की की पूजा अर्चना करने कई बार आ चुके है.

कश्मीर के श्रीनगर स्थित शंकराचार्य मंदिर को ज्येष्टेश्वर मंदिर भी कहा जाता है. यह शिव को समर्पित है. अदभुत स्थापत्य कला से भरपूर है मंदिर.

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कांवड़ यात्रा के दौरान दुकानदारों की पहचान के लिए QR कोड लगाने के आदेश पर सवाल उठाते हुए नोटिस जारी किया है. याचिकाकर्ता ने कहा कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 का उल्लंघन है और पिछली कोर्ट रोक का भी उल्लंघन करता है.

श्रावण मास की कांवड़ यात्रा-2025 को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए उत्तराखंड पुलिस ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं. हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान केदारनाथ मंदिर के आकार की एक अनोखी कांवड़ लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है. यह कांवड़ 2013 केदारनाथ त्रासदी के पीड़ितों को समर्पित है.

गाजियाबाद दिल्ली भोपुरा बॉर्डर से भारत एक्सप्रेस की स्पेशल कवरेज की गई. दिल्ली बॉर्डर में प्रवेश करते ही कांवड़ियों के स्वागत में सोमनाथ द्वारा बनाया गया. यहीं से दिल्ली सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा कांवड़ियों के रुकने और खाने पीने के कई तरह के इंतजाम देखने को मिले. फुटपाथ और सड़क के बीच में कावड़िया लेन बनाई गई. ताकि किसी भी तरह से कांवड़ियों की यात्रा में प्रावधान न आए और वह सुरक्षित भी रहे. इसके लिए दिल्ली पुलिस के साथ अर्ध सैनिक बलों (CRPF) की भी तैनाती की गई है.

भीमाशंकर मंदिर में अद्भुत स्थापत्य कला देखने को मिलती है. यह प्राचीन काल की नायब शिल्पकला को दर्शाता है. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर के वर्तमान स्वरूप का निर्माण महाराष्ट्र के राजा छत्रपति शिवाजी ने कराया था

तीर्थराज प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट पर ब्रह्मा जी ने सृष्टि का पहला यज्ञ किया था. कावड़िए यहां से गंगा जल लेकर शिवालयों में जाते हैं.

सावन का पहला सोमवार भगवान शिव के भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, और जब बात काशी विश्वनाथ मंदिर की हो, तो यह दिन और भी पावन हो जाता है. 14 जुलाई 2025 को वाराणसी स्थित प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटे और शिवभक्ति में लीन नजर आए.

बाबा हरिहर नाथ मंदिर में भक्त दूर-दूर से दर्शन करने के लिए आते हैं. यह देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां भगवान विष्णु और शिव दोनों एक साथ शिवलिंग में विराजित किए गए हैं.