केजीएमयू की महिला रेजीडेंट से जुड़े यौन शोषण और कथित धर्मांतरण नेटवर्क की परतें अब धीरे-धीरे खुलती जा रही हैं. पुलिस की ताजा कार्रवाई में आरोपी डॉ. रमीज के करीबी सारिक खान को शुक्रवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. जांच एजेंसियों का कहना है कि सारिक सिर्फ एक मददगार नहीं था, बल्कि इस पूरे कथित नेटवर्क का अहम कड़ी था.
सीधे जेल भेजा गया आरोपी
पुलिस के मुताबिक, सारिक वही शख्स है जो आगरा की एक महिला डॉक्टर के कथित धर्मांतरण के मामले में गवाह भी रहा है और जिसने पीड़िता पर दबाव बनाने में भी भूमिका निभाई. कोर्ट में पेशी के दौरान अभियोजन पक्ष ने उसके खिलाफ मौजूद सबूतों का हवाला दिया, जिसके बाद कोर्ट ने उसे जेल भेजने का आदेश दिया. इससे पहले उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था और उस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था.
जाली दस्तावेज और बदले हुए नाम
जांच में सामने आया है कि सारिक कथित तौर पर जाली दस्तावेज तैयार करने का काम करता था. पुलिस सूत्रों के अनुसार, धर्मांतरण के बाद महिलाओं के नाम बदले जाते थे और उन्हीं नए नामों पर फर्जी कागजात तैयार किए जाते थे. जब पुलिस ने उससे पूछा कि अब तक कितनी महिलाओं के धर्मांतरण में वह शामिल रहा है, तो इस सवाल पर आरोपी ने चुप्पी साध ली. पुलिस मानती है कि यह चुप्पी अपने आप में बहुत कुछ बयां करती है.
मोबाइल से मिल सकते हैं बड़े सुराग
पुलिस को सारिक के मोबाइल फोन से कई अहम जानकारियों के संकेत मिले हैं. हालांकि, आरोपी ने पूछताछ से पहले काफी डेटा डिलीट कर दिया था. अब उसका मोबाइल फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि डेटा रिकवरी के बाद इस पूरे गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के नाम और भूमिकाएं सामने आ सकती हैं.
पूछताछ में सारिक ने बताया कि वह लंबे समय से गिरफ्तारी के डर में जी रहा था. वह दिल्ली, बरेली, पीलीभीत, उत्तराखंड समेत कई जगहों पर ठिकाने बदल-बदलकर छिपता रहा. पुलिस अब उसके उन मददगारों की भी तलाश कर रही है, जिन्होंने उसे शरण दी या भागने में मदद की.
ब्रेनवॉश और ब्लैकमेलिंग के आरोप
एसीपी चौक राजकुमार सिंह के मुताबिक, सारिक विदेश भागने की फिराक में था और उसने पासपोर्ट भी बनवा लिया था. पूछताछ में उसने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसे साजिश के तहत फंसाया गया है. हालांकि, पुलिस का दावा है कि उसके बयान और बरामद सबूत उसकी भूमिका को साफ तौर पर उजागर करते हैं.
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी डॉ. रमीज कथित तौर पर लड़कियों का मानसिक रूप से ब्रेनवॉश करता था. वह उन्हें उनके धर्म की कमियां गिनाकर बहकाता और फिर धर्मांतरण के लिए प्रेरित करता था. सारिक इस पूरी प्रक्रिया में मदद करता था. पूछताछ के दौरान सारिक ने यह भी स्वीकार किया है कि रमीज के साथ मिलकर लड़कियों के अश्लील वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था.
आगे और खुलासों की उम्मीद
अब तक इस मामले में चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. पुलिस का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं. फिलहाल, पीड़िताओं को न्याय दिलाने और पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए जांच एजेंसियां हर पहलू पर गंभीरता से काम कर रही हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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