Mathura Janmabhoomi Case: उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद को कोर्ट के बाहर आपसी सहमति से सुलझाने का पहला प्रयास बेनतीजा रहा. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तहत शुक्रवार को हुई बातचीत में कोई समाधान नहीं निकल सका. इसके बाद अदालत ने अंतिम प्रयास के तौर पर दोनों पक्षों को 18 अगस्त को दोबारा बातचीत के लिए आमंत्रित किया है.
हिंदू पक्ष का प्रस्ताव
अदालत के समक्ष हुई इस वार्ता में हिंदू पक्ष के वकील महेंद्र प्रताप सिंह ने अपना पुराना प्रस्ताव दोहराया. उन्होंने मुस्लिम पक्ष को शाही ईदगाह को विवादित जगह से हटाकर किसी दूसरी जगह स्थानांतरित करने का सुझाव दिया और कहा कि इसके लिए भूमि भी उपलब्ध कराई जाएगी.
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दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधि और शाही ईदगाह इंतजामिया कमेटी के सचिव तनवीर अहमद ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और इंतजामिया कमेटी के बीच जो लिखित समझौता हुआ था, वे आज भी उसी पर कायम हैं.
‘अदालत ही करे अंतिम फैसला’
मुस्लिम पक्ष का कहना है कि जब यह पूरा मामला देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में विचाराधीन है, तो कोर्ट को ही सभी तथ्यों को देखकर फैसला सुनाना चाहिए. ऐसे में अलग से किसी समझौते या वार्ता की जरूरत नहीं रह जाती.
विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार ने दोनों पक्षों को एक और मौका देते हुए 18 अगस्त की तारीख तय की है. वकीलों का मानना है कि अगर इस अगली बैठक में भी कोई सहमति नहीं बनती है, तो फिर इस दशकों पुराने विवाद का फैसला सुप्रीम कोर्ट के जरिए ही संभव होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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