Delhi News/मृगांक प्रभाकर: आम आदमी की जेब पर महंगाई का बोझ एक बार फिर बढ़ने वाला है. रॉयटर्स (Reuters) के एक नए सर्वे के मुताबिक, अक्टूबर महीने में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) बढ़कर 5.93 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो कि सितंबर में 5.54 प्रतिशत थी. इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण खाद्य पदार्थों (Food Inflation) की कीमतों में तेजी है, जिसके 8.20 प्रतिशत तक जाने की आशंका जताई जा रही है.
रॉयटर्स के सर्वे के अनुसार, अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.93% और खाद्य महंगाई 8.20% तक पहुंच सकती है. कमजोर मानसून और सब्जियों के दाम बढ़ने से रसोई का बजट बिगड़ गया है. महंगाई के RBI की ऊपरी सीमा के करीब पहुंचने के कारण आने वाले दिनों में ब्याज दरों और EMI में बढ़ोतरी की आशंका भी जताई जा रही है.
RBI के टॉलरेंस लेवल के करीब पहुंची महंगाई
महंगाई का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ता दिखाई दे रहा है. सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर के 5.93% तक पहुंचने का अनुमान है, जो कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 6 प्रतिशत के ऊपरी टॉलरेंस लेवल के बेहद करीब है. सब्जियों से लेकर दूध, अंडे और खाद्य तेलों तक हर चीज की कीमतें आम आदमी को परेशान कर रही हैं.
कमजोर मानसून और आपूर्ति पर संकट मुख्य वजह
अर्थशास्त्री आकाश जिंदल के अनुसार, महंगाई में इस उछाल के पीछे कमजोर मानसून और खाद्य आपूर्ति में आई बाधा मुख्य वजह है. बारिश के असमान वितरण से कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ है. खासकर प्याज के दाम साल की शुरुआत से दोगुने हो चुके हैं. चूंकि खुदरा महंगाई बास्केट में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी करीब 40% है, इसलिए इनमें हुआ मामूली उछाल भी पूरे आंकड़े को ऊपर ले जाता है.
बढ़ सकती है आपकी EMI, रेपो रेट में बदलाव की आशंका
बढ़ती महंगाई अब रिजर्व बैंक (RBI) के लिए भी बड़ी चुनौती बन गई है. यदि अक्टूबर के अनुमान सही साबित होते हैं, तो ब्याज दरों पर दबाव और बढ़ जाएगा. अक्टूबर में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के बाद अब दिसंबर में एक और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है, जिससे होम लोन और अन्य कर्जों की ईएमआई (EMI) बढ़ सकती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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