विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में लागू किए गए नए भेदभाव-निरोधक कानून को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. हापुड़ के बक्सर गांव के सैकड़ों लोगों ने अपने घरों के बाहर पोस्टर चस्पा कर इस कानून का विरोध किया है. वहीं, इस कानून का विरोध अब केवल विपक्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर भाजपा के कुछ पुराने कार्यकर्ता भी खुलकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं.
हापुड़ में यूजीसी कानून पर नाराजगी बढ़ी
हापुड़ के सिंभावली क्षेत्र के गांव बक्सर में कुछ लोगों ने मकान के बाहर पोस्टर लगाकर विरोध दर्ज कराया है. पोस्टरों में लिखा गया है कि भाजपा नेता वोट मांगने न आए, यह स्वर्ण समाज का घर है. साथ ही अंग्रेजी में स्वर्ण अगेंस्ट बीजेपी लिखा गया है. पोस्टरों के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं. लोगों का कहना है कि सरकार को कानून लागू करने से पहले सभी वर्गों से संवाद करना चाहिए. फिलहाल यूजीसी के इस नए कानून को लेकर विरोध के स्वर लगातार तेज होते नजर आ रहे हैं.
सभी को मिलेगा समान व्यवहार
दरअसल, यूजीसी के नियमों के अनुसार जाति-आधारित भेदभाव का अर्थ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों के साथ केवल उनकी जाति या जनजाति के आधार पर किया गया भेद है. वहीं भेदभाव की परिभाषा को और व्यापक करते हुए धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान, विकलांगता के आधार पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किए गए किसी भी अनुचित या पक्षपातपूर्ण व्यवहार को इसके दायरे में रखा गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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