सिर्फ नाम या मूल विचार? जानिए 2027 की राजनीति में क्यों याद आ रहे हैं कांशीराम
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांशीराम की साइकिल यात्रा एक बार फिर चर्चा में है. 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कई राजनीतिक दल उनकी विरासत और बहुजन राजनीति से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं.
क्या है बीजेपी की नई यूपी रणनीति? लखनऊ से लेकर बूथ तक ऐसे बिछ रहा है चुनावी जाल
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने लखनऊ में अपनी संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं.
हिंदुत्व, जाति और विकास; जानिए यूपी की सियासत में कैसे बदला बीजेपी का फॉर्मूला?
कल्याण सिंह से योगी आदित्यनाथ तक उत्तर प्रदेश की राजनीति का सफर सिर्फ दो मुख्यमंत्रियों के बीच सत्ता हस्तांतरण की कहानी नहीं है. यह करीब तीन दशकों में बीजेपी की विचारधारा, सामाजिक समीकरण, हिंदुत्व की राजनीति, संगठन और शासन के बदलते स्वरूप की कहानी है.
विफलता मेरी, सफलता टीम की: डॉ. कलाम के गुरु सतीश धवन की वो सीख, जिसने बदला मैनेजमेंट का नजरिया
ISRO History: विफलता की जिम्मेदारी खुद लेना और सफलता का श्रेय टीम को देना- जानिए डॉ. कलाम के गुरु प्रो. सतीश धवन की उस लीडरशिप शैली के बारे में जिसने इसरो को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया.
चिता की आग और मोक्ष की नगरी, क्या आपने देखी है बनारस की इस दुनिया की असली तस्वीर?
बनारस को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, लेकिन इसी शहर की चिताओं के बीच एक ऐसी दुनिया भी बसती है, जिसे समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है. राधिका आयंगर की किताब बनारस का मसान डोम समुदाय के जीवन, संघर्ष, सपनों और सामाजिक भेदभाव की इसी अनदेखी दुनिया से पाठकों को रूबरू कराती है.
कौन थीं भीकाजी कामा? जिन्होंने जर्मनी में फहराया था आज़ादी का झंडा, जानिए विदेशी धरती से कैसे हिलाया था ब्रिटिश शासन
आज भारत की स्वतंत्रता संग्राम की महानायिका मैडम भीकाजी रुस्तम कामा की जयंती है. वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की उन विरल महिलाओं में से थीं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की आवाज बुलंद की और 1907 में स्टटगार्ट में ऐतिहासिक रूप से वंदे मातरम ध्वज फहराकर विश्व को भारत की स्वतंत्रता की आकांक्षा से परिचित कराया.
सिर्फ ‘वीर रस’ नहीं, बदलाव की आवाज थे दिनकर; जानिए क्यों आज भी प्रासंगिक हैं राष्ट्रकवि?
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिंदी साहित्य के उन महान कवियों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी ओजपूर्ण लेखनी से वीर रस को नई पहचान दी.
सीने पर खाईं 5 गोलियां, फिर भी कब्जे में लिए पाक के टैंक: पढ़ें महावीर चक्र विजेता मेजर आशाराम त्यागी की अमर गाथा
1965 के भारत-पाक युद्ध में डोगरई की जंग के हीरो और महावीर चक्र विजेता मेजर आशाराम त्यागी का बलिदान अमर है. शरीर में 5 गोलियां लगने के बावजूद उन्होंने पाकिस्तानी टैंकों को तबाह कर डोगरई पर तिरंगा फहराया था.
निजाम की जिद, रजाकारों का अत्याचार और भारत में विलय: पढ़ें हैदराबाद के एकीकरण की पूरी दास्तान
आजादी के समय हैदराबाद को भारत में मिलने से रोकने वाले रजाकार कौन थे? जानिए कासिम रजवी के आतंक, निजाम की भूमिका और भारतीय सेना के 'ऑपरेशन पोलो' की पूरी कहानी.
महज एक नेता नहीं, सादगी की मिसाल थे भोला पासवान शास्त्री; जानिए क्यों आज भी प्रासंगिक है उनकी कहानी
बिहार की राजनीति का जिक्र आते ही अक्सर बड़े-बड़े काफिले और सत्ता का रुआब आंखों के सामने आ जाता है. लेकिन इसी बिहार की जमीन ने एक ऐसा नेता भी पैदा किया था, जिसने सत्ता के शीर्ष पर बैठकर भी फकीरी का दामन नहीं छोड़ा.





