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Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
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विशेष

अमर फारूकी की किताब Governors of Empire बताती है कि कैसे ईस्ट इंडिया कंपनी व्यापार करने के इरादे से भारत आई और धीरे-धीरे राजनीतिक चालों, सैन्य ताकत और सहायक संधियों के जरिए एक बड़ी औपनिवेशिक शक्ति बन गई.

बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह उर्फ श्री बाबू स्वतंत्रता संग्राम, किसान आंदोलन और सामाजिक न्याय की राजनीति के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं.

ब्रिटेन और फ्रांस जैसी बड़ी औपनिवेशिक ताकतों से घिरे होने के बावजूद थाईलैंड आखिर कैसे अपनी आजादी बचाने में कामयाब रहा? जानिए सियाम की दिलचस्प कहानी, जहां राजाओं की दूरदर्शिता, आधुनिक सुधारों और कूटनीतिक समझ ने देश को यूरोपीय गुलामी से बचाने में अहम भूमिका निभाई.

उत्तराखंड की नंदा देवी की बर्फीली चोटियों में छिपा है एक ऐसा रहस्य, जिसका संबंध भारत-अमेरिका के गुप्त मिशन और चीन के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा है.

19 अक्टूबर 1910 को लाहौर (तब ब्रिटिश भारत, अब पाकिस्तान) में जन्मे सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर आधुनिक खगोलभौतिकी के महानतम वैज्ञानिकों में से एक थे. वे नोबेल पुरस्कार विजेता सर चंद्रशेखर वेंकट रमन के भतीजे थे.

आनंद नीलकंठन की किताब विविध रामायण, विविध पाठ बताती है कि रामायण सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही अनेक कथाओं और परंपराओं का संगम है.

18 अक्टूबर 1969 को हैदराबाद के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में भारत-न्यूजीलैंड टेस्ट के दौरान पिच विवाद और पुलिसिया कार्रवाई से भड़की हिंसा में स्टेडियम में आगजनी और पथराव हुआ था.

ND Tiwari Birth Anniversary: नारायण दत्त तिवारी भारतीय राजनीति के ऐसे दुर्लभ नेता थे, जिन्होंने यूपी और उत्तराखंड दोनों राज्यों के सीएम पद को संभाला. 18 अक्टूबर को ही उनका जन्म और निधन हुआ। विकास पुरुष से लेकर डीएनए-सेक्स स्कैंडल विवाद तक, जानिए उनकी पूरी कहानी.

1943 के बंगाल अकाल में लाखों लोगों ने भूख और कुपोषण के कारण अपनी जान गंवाई, लेकिन इसी दौरान दुर्गा पूजा की परंपरा भी जारी रही. कहीं पूजा की थालियों में तरह-तरह के पकवान सज रहे थे, तो कहीं लोग एक कटोरी खिचड़ी के लिए तरस रहे थे. ऐसे मुश्किल दौर में भोग सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भूख, सामाजिक असमानता और इंसानियत की कहानी भी बन गया.

केरल के पलक्कड़ में रहने वाले पी. बी. मेनन (पूर्ण नाम: पी. बालासुब्रमण्यन मेनन) का जीवन वकालत के प्रति समर्पण और लगन की एक अनोखी मिसाल है. 15 अक्टूबर 1926 को जन्मे मेनन आज 100 वर्ष के हो चुके हैं (या कल हो रहे हैं), फिर भी वे सिविल मामलों की पैरवी करते हुए अदालत में सक्रिय हैं.


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