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दूरदर्शन पर शाम का वो प्रसारण…जानिए 1986 में अयोध्या के ताले खुलने की खबर ने कैसे पूरे देश को चौंका दिया था

रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर बहुत कुछ लिखा जा चुका है. ‘जिरह अजुधिया : एक पुरातत्त्वविद् की कलम से’ उन सबसे इस मामले में अलग है कि इसे उस व्यक्ति ने लिखा है जो इस विवाद के सबसे निर्णायक मोड़ पर विवादित स्थल के सबसे निकट था.

1 फरवरी 1986 की सुबह की खबर ने उस वक्त पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. अखबारों में बड़ी सुर्खी थी ‘राम जन्मभूमि के ताले खुले.’ यह वही घटना थी जिसने आगे चलकर भारत की राजनीति और समाज दोनों पर गहरा असर डाला. उत्तर प्रदेश के अयोध्या (तब फैजाबाद का हिस्सा) में स्थित विवादित ढांचे के ताले जिला अदालत के आदेश के बाद खोले गए. इसके बाद वहां पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन का सिलसिला शुरू हो गया, जिसने माहौल को पूरी तरह बदल दिया.

स्थानीय लोगों के बीच अचानक खुशी और भावनात्मक माहौल बन गया. कई जगहों पर ‘जय श्रीराम’ के नारे गूंजने लगे और मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी. उस समय यह घटना सिर्फ एक कानूनी आदेश नहीं रही, बल्कि एक बड़े सामाजिक और धार्मिक बदलाव की शुरुआत के तौर पर देखी गई.

अदालत का आदेश और प्रशासनिक हलचल

यह आदेश फैजाबाद की अदालत से जिला जज के स्तर पर दिया गया था. आदेश के बाद प्रशासन ने जल्दी ही ताला खोलने की कार्रवाई पूरी कर दी. बताया जाता है कि जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की सहमति के बाद यह प्रक्रिया बिना बड़े विरोध के संपन्न हुई.

इस घटना को उस समय मीडिया ने भी काफी प्रमुखता से दिखाया. दूरदर्शन, जो उस दौर का प्रमुख टीवी माध्यम था, ने इस पूरे घटनाक्रम का प्रसारण शाम को किया. उस समय कोई निजी न्यूज चैनल नहीं थे, इसलिए इस खबर का असर पूरे देश में एक साथ महसूस किया गया.

राजनीति और समाज पर असर

इस पूरे घटनाक्रम को उस समय के राजनीतिक माहौल से भी जोड़कर देखा गया. उस दौर में देश पहले से ही कई सामाजिक और कानूनी बहसों से गुजर रहा था. खासकर शाह बानो मामला के फैसले के बाद देश में धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर बहस तेज हो चुकी थी. इसी पृष्ठभूमि में यह घटना और अधिक संवेदनशील बन गई.

तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में यह पूरा घटनाक्रम हुआ, और इसे लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं. कुछ लोगों ने इसे प्रशासनिक निर्णय बताया, तो कुछ ने इसे बड़े सामाजिक बदलाव की शुरुआत माना.

देश में बढ़ता भावनात्मक माहौल

ताला खुलने के बाद अयोध्या में धार्मिक गतिविधियां बढ़ गईं और देश के कई हिस्सों में इसका असर दिखने लगा. कई शहरों और गांवों में लोगों के बीच इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हो गईं. धीरे-धीरे यह मामला सिर्फ एक स्थान विशेष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े आंदोलन और बहस का हिस्सा बन गया.

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भारत एक्सप्रेस



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