Bharat Express DD Free Dish

जिन्ना के ’14 सूत्र’ और अंग्रेजों का खेल: जानिए कैसे एक मांग धीरे-धीरे बन गई अलग देश ‘पाकिस्तान’

पाकिस्तान का निर्माण 1947 की अचानक घटी घटना नहीं थी. 1857 के गदर, अंग्रेजों की नीति, मुस्लिम लीग के गठन और 1937 के चुनावों ने कैसे भारत विभाजन की जमीन तैयार की, जानिए पूरी कहानी.

How Was Pakistan Created History Of Indian Partition 1857 To 1947
Edited by Vaibhav Gupta

Partition Of India: पाकिस्तान का निर्माण 1947 में अचानक नहीं हुआ. यह दशकों की राजनीतिक, सामाजिक और सांप्रदायिक घटनाओं का परिणाम था, जिन्होंने ब्रिटिश भारत में हिंदुओं और मुसलमानों के संबंधों को धीरे-धीरे बदल दिया. यह कहानी स्वयं विभाजन से बहुत पहले शुरू होती है.

1857 का विद्रोह और विभाजन के बीज

1857 में हिंदू और मुसलमान ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक बड़े विद्रोह में एक साथ खड़े हुए थे. इस एकता ने औपनिवेशिक अधिकारियों को चिंतित कर दिया. इसके बाद के वर्षों में ब्रिटिशों ने व्यवस्थित रूप से ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति अपनाई. दोनों समुदायों को अलग-अलग राजनीतिक इकाइयां मानकर और आपसी संदेह को बढ़ावा देकर उन्होंने भविष्य में किसी संयुक्त चुनौती को रोकने की कोशिश की. इस नीति ने भारतीय राजनीति की दिशा को मौलिक रूप से बदल दिया.

शैक्षिक पिछड़ापन और अलीगढ़ आंदोलन

1871 में हंटर आयोग ने 1857 के बाद भारतीय मुसलमानों की शैक्षिक और आर्थिक पिछड़ेपन को रेखांकित किया. सर सैयद अहमद खान ने इसका जवाब अलीगढ़ आंदोलन शुरू करके दिया. आधुनिक शिक्षा और मुहम्मदन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज (बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय) की स्थापना के माध्यम से उन्होंने मुस्लिम समुदाय को ऊपर उठाने, सरकारी सेवाओं के लिए तैयार करने और एक विशिष्ट राजनीतिक पहचान बनाने का प्रयास किया. यह आंदोलन पारंपरिक शिक्षा से पश्चिमी शैली की शिक्षा की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव था, साथ ही इसने एक अलग मुस्लिम चेतना को मजबूत किया.

बढ़ती राजनीतिक चेतना

1905 के स्वदेशी आंदोलन ने, बंगाल के विभाजन से प्रेरित होकर, पूरे भारत में लाखों लोगों को प्रेरित किया. हालांकि, इसमें हिंदू धार्मिक प्रतीकों और मुहावरों के बार-बार इस्तेमाल ने कई मुसलमानों में बेचैनी पैदा की. ठीक एक साल बाद, 1906 में ढाका में अखिल भारतीय मुस्लिम लीग का गठन हुआ. लीग ने जल्द ही अलग निर्वाचन क्षेत्रों की मांग की ताकि मुसलमान अपने प्रतिनिधियों का चुनाव खुद कर सकें. यह मांग 1909 के मॉर्ले-मिंटो सुधारों में स्वीकार कर ली गई, जिसमें अलग निर्वाचन क्षेत्र शुरू किए गए और मुसलमानों को औपनिवेशिक संवैधानिक ढांचे के भीतर एक विशिष्ट राजनीतिक आवाज दी गई.

एकता के प्रयास और बढ़ती दूरी

1920 के दशक के अंत में बढ़ती खाई को पाटने का प्रयास किया गया. 1928 की नेहरू रिपोर्ट ने संयुक्त निर्वाचन क्षेत्रों की वापसी और एक अधिक एकीकृत संवैधानिक व्यवस्था का प्रस्ताव रखा. मुहम्मद अली जिन्ना ने इस रिपोर्ट को अस्वीकार कर दिया. इसके जवाब में उन्होंने अपने प्रसिद्ध चौदह सूत्र पेश किए, जिनमें अलग निर्वाचन क्षेत्रों को बनाए रखने, अधिक प्रांतीय स्वायत्तता और केंद्रीय विधानमंडल में मुसलमानों के लिए एक-तिहाई प्रतिनिधित्व की मांग की गई थी. ये सूत्र मुस्लिम राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों की स्पष्ट मांग को दर्शाते थे.

1937 का निर्णायक मोड़

1937 के प्रांतीय चुनाव निर्णायक साबित हुए. अलग निर्वाचन क्षेत्रों के बावजूद मुस्लिम लीग ने अधिकांश प्रांतों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के खिलाफ खराब प्रदर्शन किया. जिन्ना के लिए यह हार सिर्फ एक चुनावी झटका नहीं थी. इससे उन्हें यह विश्वास हो गया कि मुसलमान कांग्रेस-प्रभुत्व वाले ढांचे के भीतर अपना राजनीतिक भविष्य सुरक्षित नहीं कर सकते. इस बिंदु से लीग की रणनीति तेजी से मुस्लिम पहचान को संगठित करने और खुद को मुस्लिम हितों का एकमात्र प्रतिनिधि प्रस्तुत करने के इर्द-गिर्द घूमने लगी. एक अलग मातृभूमि का विचार आने वाले वर्षों में और स्पष्ट रूप लेता गया.

पाकिस्तान का उदय

पाकिस्तान का उदय एक लंबी प्रक्रिया का परिणाम था. यह 1857 के आघात और ब्रिटिश विभाजन नीति से शुरू हुआ, मुसलमानों के बीच शैक्षिक और राजनीतिक आंदोलनों से आकार लिया, अलग प्रतिनिधित्व की संवैधानिक मांगों के माध्यम से मजबूत हुआ, और 1937 के चुनावी अनुभव के बाद तेज हुआ. जो शुरू में एक संयुक्त भारत के भीतर सुरक्षा उपायों की मांग थी, वह धीरे-धीरे एक अलग राज्य की मांग में बदल गई. 1947 की घटनाएं इस दशकों लंबी राजनीतिक विकास का अंतिम रूप थीं.

यह भी पढ़ें: ‘स्टीफन हॉकिंग वाली लीग में शामिल हुए भारतीय वैज्ञानिक’ प्रो. दीपक धर को मिला सैद्धांतिक भौतिकी का सर्वोच्च डिराक मेडल

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read