क्या पौधों को भी दर्द होता है? जगदीश चंद्र बोस की उस खोज की कहानी, जिसने दुनिया को हैरान कर दिया
भारतीय वैज्ञानिक सर जगदीश चंद्र बोस ने अपने क्रांतिकारी प्रयोगों के जरिए यह साबित किया कि पौधे निर्जीव नहीं होते, बल्कि उनमें भी संवेदनशीलता और प्रतिक्रिया की क्षमता होती है.
कुर्सी का मोह या संवैधानिक मजबूरी? ममता बनर्जी के इस्तीफे पर अड़ने से याद आया 1998 का कल्याण सिंह मामला
1998 में उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह और जगदंबिका पाल के बीच हुए 'दो मुख्यमंत्री' वाले संवैधानिक संकट की यादें अब बंगाल चुनाव 2026 के नतीजों के बाद ताजा हो गई हैं. जहां भाजपा को बहुमत मिला है और ममता बनर्जी ने इस्तीफे से इनकार किया है.
रिक्शा के हैंडल से बिहार की सत्ता के स्टियरिंग तक; कौन हैं रत्नेश सदा, जिन्होंने सम्राट कैबिनेट में ली शपथ?
रत्नेश सदा का जीवन संघर्ष और मेहनत की मिसाल है, जिन्होंने गरीबी में जन्म लेकर रिक्शा चलाते हुए अपनी पढ़ाई पूरी की और आज जेडीयू के विधायक से बिहार सरकार में मंत्री बनने तक का सफर तय किया है.
बंगाल में 1967 की वो एक सीट और आज बहुमत का दांव, गोपाल चंद्र मंडल से 2026 की प्रचंड लहर तक भाजपा का सफर
भारतीय जनता पार्टी की जड़ें भारतीय जनसंघ में हैं, जिसकी स्थापना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1951 में की थी. पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक वामपंथी और कांग्रेस के दबदबे के बावजूद जनसंघ ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.
बंगाल में भाजपा का ‘विजय रथ’: 1967 में गोसाबा से शुरू हुई थी पहली विधायक की कहानी, अब बहुमत की ओर!
पश्चिम बंगाल में भाजपा के उदय की कहानी 1967 के चुनाव से शुरू होती है, जब जनसंघ के गोपाल चंद्र मंडल ने गोसाबा सीट जीतकर राज्य में पार्टी का खाता खोला था. वामपंथी दौर की उस छोटी सी शुरुआत से लेकर आज 2026 के विधानसभा चुनाव तक, भाजपा ने एक लंबा सफर तय किया है.
World Press Freedom Day: ‘बड़ी आई पत्रकार’ ग्रामीण भारत की उन महिलाओं की कहानी जिन्होंने बदल दी पत्रकारिता की परिभाषा
आज 3 मई को विश्व पत्रकारिता दिवस (World Press Freedom Day) मनाया जा रहा है.
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर: ‘छत पर मैराथन’–पत्रकारिता की सच्ची दौड़ का दस्तावेज
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर विजय विद्रोही की किताब ‘छत पर मैराथन’ ने पत्रकारिता के संघर्ष और सच्चाई को सामने रखा. यह पुस्तक बताती है कि प्रेस की आज़ादी हर दिन की लड़ाई है, कोई स्थायी अधिकार नहीं...
गौरीशंकर राय : संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी संबोधन के सूत्रधार, जानें भाषाई गौरव की ऐतिहासिक कहानी
स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व सांसद गौरीशंकर राय की आज पुण्यतिथि है. वे वही शख्सियत थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी को पहचान दिलाने के लिए प्रधानमंत्री स्तर तक पैरवी की थी. अटल बिहारी वाजपेयी के ऐतिहासिक हिंदी संबोधन के पीछे गौरीशंकर राय की दृढ़ इच्छाशक्ति का बड़ा हाथ था.
मजदूर दिवस 2026: कौन थे सिंगरावेलु चेट्टियार? जिन्होंने 103 साल पहले मद्रास के बीच पर भरी थी हुंकार
भारत में मजदूर दिवस की शुरुआत 1923 में मलयपुरम सिंगरावेलु चेट्टियार ने की थी. एक वकील और कम्युनिस्ट नेता के रूप में उन्होंने पहली बार भारत में लाल झंडा फहराया और मजदूरों के लिए 8 घंटे काम की मांग की.
फातिमा बीबी: सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज और एशिया की पहली महिला सुप्रीम कोर्ट जज
फातिमा बीबी ने सामाजिक बाधाओं को तोड़ते हुए सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज बनकर इतिहास रचा और एशिया की महिलाओं के लिए नई राह दिखाई.





