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Lord Hanuman Birthplace Truth: महावीर हनुमान का जन्म कहां हुआ था? ये सवाल आपके मन में भी उठता होगा. आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के अलग-अलग दावों के बीच जानिए बजरंगबली के जन्म से जुड़ा पूरा शास्त्र सम्मत सच...

बिहार की लोकसंगीत परंपरा को समर्पित प्रख्यात लोकगायक और संगीतकार भरत सिंह भारती को पद्म श्री सम्मान से नवाज़ा गया है.

500 साल से रहस्यमय रहे बरमूडा ट्रायंगल पर एक नई रिसर्च ने इसकी गुत्थी सुलझाने की चर्चा तेज कर दी हैं. कुछ वैज्ञानिकों को समंदर में 12 मील मोटी अनोखी चट्टान मिली, सवाल उठ रहा है कि क्या अब उधर से पानी के जहाज या विमान गुजर सकेंगे?

रास बिहारी बोस उन महान क्रांतिकारियों में थे, जिन्होंने विदेश में रहकर भी भारत की आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी. जापान में रहते हुए उन्होंने इंडियन इंडिपेंडेंस लीग और आजाद हिंद फौज की नींव रखी.

भारतीय कुश्ती को नई पहचान देने वाले गुरु हनुमान आज भी खेल जगत में प्रेरणा का सबसे बड़ा नाम माने जाते हैं. राजस्थान के एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने दिल्ली में ऐसा अखाड़ा खड़ा किया, जिसने देश को कई अंतरराष्ट्रीय पहलवान दिए.

Nagarwala Bank Scam 1971: 24 मई 1971 को इंदिरा गांधी की आवाज में आई एक फर्जी फोन कॉल पर एसबीआई से ₹60 लाख गायब किए. आरोपी कैप्टन नागरवाला की गिरफ्तारी, फिर रहस्यमयी मौतों और जांच आयोगों के बावजूद, 5 दशक बाद भी मामला भारतीय इतिहास का अनसुलझा रहस्य बना है.

23 मई 1984 का दिन भारतीय इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा, जब उत्तराखंड की बेटी बछेंद्री पाल ने माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर तिरंगा फहराया और भारत की पहली महिला एवरेस्ट विजेता बनीं.

महारानी गायत्री देवी ने महलों की आरामदायक जिंदगी छोड़कर समाज में बदलाव की मिसाल कायम की है. उन्होंने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए MGD स्कूल की स्थापना की, महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाई और राजनीति से लेकर ग्रामीण विकास तक सक्रिय भूमिका निभाई.

भारत में आज 'आत्मनिर्भरता' और 'लोकल के लिए वोकल' जैसे नारे खूब सुनाई देते हैं. लेकिन क्या सिर्फ आर्थिक और राजनीतिक आज़ादी ही काफी है? क्या हमारी सोच, हमारा ज्ञान और दुनिया को देखने का तरीका भी पूरी तरह आज़ाद हो पाया है? इसी बड़े और असहज सवाल को सामने लाती है अभय कुमार दुबे की नई किताब ‘उपनिवेशवाद का अलौकिक साम्राज्य’.

भारतीय विज्ञान और सेवा की परंपरा में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है, जब डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन और उनकी पुत्री डॉ. सौम्या स्वामीनाथन को रॉयल सोसाइटी से जुड़ने का गौरव प्राप्त हुआ.