सब्जी मंडी में फल बेचने वाले ‘विजय पाल’ कैसे बने कुश्ती के ‘महागुरु हनुमान’? जानिए आखिर क्या है उनकी कहानी
भारतीय कुश्ती को नई पहचान देने वाले गुरु हनुमान आज भी खेल जगत में प्रेरणा का सबसे बड़ा नाम माने जाते हैं. राजस्थान के एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने दिल्ली में ऐसा अखाड़ा खड़ा किया, जिसने देश को कई अंतरराष्ट्रीय पहलवान दिए.
एक फर्जी कोडवर्ड और लुटा स्टेट बैंक! आखिर क्या है नागरवाला की मिस्ट्री जो 5 दशकों से है रहस्यमयी?
Nagarwala Bank Scam 1971: 24 मई 1971 को इंदिरा गांधी की आवाज में आई एक फर्जी फोन कॉल पर एसबीआई से ₹60 लाख गायब किए. आरोपी कैप्टन नागरवाला की गिरफ्तारी, फिर रहस्यमयी मौतों और जांच आयोगों के बावजूद, 5 दशक बाद भी मामला भारतीय इतिहास का अनसुलझा रहस्य बना है.
‘यह काम लड़कियों का नहीं…’ समाज को ठेंगा दिखा ऐसे चूमा एवरेस्ट का शिखर
23 मई 1984 का दिन भारतीय इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा, जब उत्तराखंड की बेटी बछेंद्री पाल ने माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर तिरंगा फहराया और भारत की पहली महिला एवरेस्ट विजेता बनीं.
Maharani Gayatri Devi: जयपुर की उस महारानी की कहानी, जिसने लड़कियों की पढ़ाई के लिए बदल दिए थे नियम
महारानी गायत्री देवी ने महलों की आरामदायक जिंदगी छोड़कर समाज में बदलाव की मिसाल कायम की है. उन्होंने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए MGD स्कूल की स्थापना की, महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाई और राजनीति से लेकर ग्रामीण विकास तक सक्रिय भूमिका निभाई.
अंग्रेज गए पर दिमाग छोड़ गए? पश्चिमी सोच के वर्चस्व को चुनौती देती ‘उपनिवेशवाद का अलौकिक साम्राज्य’
भारत में आज 'आत्मनिर्भरता' और 'लोकल के लिए वोकल' जैसे नारे खूब सुनाई देते हैं. लेकिन क्या सिर्फ आर्थिक और राजनीतिक आज़ादी ही काफी है? क्या हमारी सोच, हमारा ज्ञान और दुनिया को देखने का तरीका भी पूरी तरह आज़ाद हो पाया है? इसी बड़े और असहज सवाल को सामने लाती है अभय कुमार दुबे की नई किताब ‘उपनिवेशवाद का अलौकिक साम्राज्य’.
गर्व के पल! रॉयल सोसाइटी में स्वामीनाथन परिवार ने रचा इतिहास, पिता-पुत्री की जोड़ी को मिला यह सर्वोच्च सम्मान
भारतीय विज्ञान और सेवा की परंपरा में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है, जब डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन और उनकी पुत्री डॉ. सौम्या स्वामीनाथन को रॉयल सोसाइटी से जुड़ने का गौरव प्राप्त हुआ.
‘सौंदर्य क्षणिक है, सोच असली ताकत…’, सुष्मिता सेन की वो जीत जिसने भारतीय महिलाओं को दिए नए पंख
21 मई 1994 का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है, जब मात्र 19 वर्ष की उम्र में सुष्मिता सेन ने मिस यूनिवर्स का ताज जीतकर देश का नाम रोशन किया.
सिर्फ जीवनी नहीं, हिंदी सिनेमा का जीवंत दस्तावेज है ‘दास्तान-ए-गुरुदत्त’; हैबिटैट फिल्म फेस्टिवल में हुआ लोकार्पण
दिल्ली के इंडिया हैबिटैट सेंटर में 18वें हैबिटैट फिल्म फेस्टिवल 2026 के तहत आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मशहूर दास्तानगो और रंगकर्मी महमूद फ़ारूक़ी की किताब ‘दास्तान-ए-गुरुदत्त’ का लोकार्पण किया गया.
वसंत पाडुकोण कैसे बने सिनेमा के ‘प्यासा’ गुरु दत्त? नई किताब में दर्द, तन्हाई और गीता दत्त से रिश्तों की अनकही दास्तान
गुरु दत्त का नाम हिंदी सिनेमा में सिर्फ एक निर्देशक या अभिनेता के तौर पर नहीं, बल्कि उस कलाकार के रूप में लिया जाता है जिसने अपने समय की पीड़ा, अकेलेपन और टूटते रिश्तों को पर्दे पर बेहद खूबसूरती से उतारा है.
सड़क परिवहन मंत्री से सूबे के ‘मुख्यमंत्री’ तक… अनुशासन की मिसाल भुवन चंद्र खंडूरी ने छोड़ी अमिट छाप
देहरादून से आई यह खबर पूरे उत्तराखंड और देश के लिए शोक का विषय बन गई है. उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय सेना के वरिष्ठ पूर्व अधिकारी मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी का 91 वर्ष की आयु में देहरादून में निधन हो गया.







