IFS ऑफिसर से लोकसभा स्पीकर तक, बाबू जगजीवन राम की विरासत और मीरा कुमार का बुलंद सफर
मीरा कुमार भारतीय राजनीति की एक ऐसी सशक्त और प्रेरणादायक हस्ती हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा, सौम्यता और दृढ़ नेतृत्व के बल पर देश की संसदीय परंपराओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.
देश की पहली महिला डॉक्टर: आनंदीबाई जोशी
आज देश की पहली महिला डॉक्टर आनंदीबाई जोशी की जयंती है. 19वीं सदी के रूढ़िवादी समाज की बेड़ियां तोड़कर अमेरिका से मेडिकल डिग्री लेने वाली आनंदीबाई की कहानी आंसू और साहस की मिसाल है.
देविका रानी चौधरी: भारतीय सिनेमा की पहली नायिका
आज भारतीय सिनेमा की नींव रखने वाली महान अभिनेत्री देविका रानी की 118वीं जयंती है. लंदन में पढ़ाई, 'बॉम्बे टॉकीज' की स्थापना और पर्दे पर सामाजिक बेड़ियों को तोड़ने वाली देविका रानी का सफर बेहद साहसी रहा.
‘जाति नहीं, कर्म से महान बनता है इंसान’; 75 साल बाद भी क्यों प्रासंगिक है दिनकर की ‘रश्मिरथी’?
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कृति ‘रश्मिरथी’ हिंदी साहित्य का एक कालजयी खंडकाव्य है, जो महाभारत के महान योद्धा कर्ण के जीवन, संघर्ष, दान, वीरता और अंतिम बलिदान पर केंद्रित है.
भारतीय रंगमंच की अनूठी दास्तान को बयां करता ‘मंच प्रवेश’: Book Review
27 मार्च को दुनिया भर में विश्व रंगमंच दिवस मनाया जा रहा है. इस मौके पर राजकमल प्रकाशन से आई फैसल अलकाजी की किताब 'मंच प्रवेश' चर्चा के केंद्र में है.
1940 के दशक में पारसी समुदाय को ईरान में पुनर्वासित करने का प्रस्ताव क्यों कभी अमल में नहीं आया
1947 में भारत की आज़ादी के समय, ईरान के कुछ अखबारों और ज़ोरोएस्ट्रियन नेताओं ने एक विचार रखा कि भारत में बसे पारसी समुदाय को उनकी ‘पितृभूमि’ ईरान वापस बुलाया जाए.
कौन थीं अन्ना मणि? जिन्होंने मौसम विज्ञान को आत्मनिर्भर बनाया
अन्ना मणि, जिन्हें 'भारत की वेदर वुमन' कहा जाता है, मौसम विज्ञान और ओजोन अध्ययन में अग्रणी थीं. उन्होंने भारत में मौसम उपकरणों का विकास किया और ओजोनसोंडे जैसे उपकरण तैयार किए.
फांसी के फंदे से ठीक पहले भगत सिंह के आखिरी शब्द; ‘मेरे भगत सिंह’ ने खोले अनछुए राज | Book Review
अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की 95वीं बरसी पर पंकज चतुर्वेदी की नई किताब ‘मेरे भगत सिंह’ चर्चा में है. यह किताब भगत सिंह को केवल एक क्रांतिकारी नायक के रूप में नहीं, बल्कि लाहौर के उस घर के एक लाडले बेटे और जेल की कोठरी में गहन दर्शन पर बहस करने वाले एक प्रखर विद्वान के रूप में पेश करती है.
पानी का शाप या कुप्रबंधन का परिणाम? बिहार की त्रासद विरासत पर डॉ. दिनेश कुमार मिश्र का बड़ा खुलासा
बिहार में पानी कभी सिर्फ जीवन का स्रोत नहीं रहा, वह एक विरोधाभास है जहां एक ही समय में बाढ़ और सुखाड़ दोनों मौजूद रहते हैं. यह प्रकृति का दोष नहीं, बल्कि हमारी नीतियों और समझ की सीमाओं का परिणाम है.
‘यह जो बिहार है’ और ‘हमर चंपारण’- बिहार की आत्मा और इतिहास के गहन चिंतन को उकेरती अरविंद मोहन की पुस्तकें
बिहार को समझना दरअसल भारत की उस आत्मा को समझना है, जो तर्क करती है, सवाल पूछती है और हर स्थापित सत्य को चुनौती देती है. यहां ‘मैं’ का स्थान ‘हम’ ने ले लिया है. यह सिर्फ भाषा नहीं, बल्कि एक सोच है.





