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मिट्टी की खुशबू से पद्म श्री तक! जानिए कौन हैं भोजपुरी लोकसंगीत के स्तंभ भरत सिंह भारती

बिहार की लोकसंगीत परंपरा को समर्पित प्रख्यात लोकगायक और संगीतकार भरत सिंह भारती को पद्म श्री सम्मान से नवाज़ा गया है.

बिहार की मिट्टी से उठने वाली लोकधुनों को अपनी आवाज़, अपनी मेहनत और अपने जीवन का हिस्सा बनाने वाले प्रख्यात लोकगायक और संगीतकार भरत सिंह भारती को इस साल पद्म श्री सम्मान से नवाज़ा गया है. यह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं है, बल्कि उस लंबी यात्रा की पहचान है, जिसमें उन्होंने लगभग सात दशकों तक लगातार लोकसंगीत को जिया, संभाला और आगे बढ़ाया.

भरत सिंह भारती का नाम भोजपुरी लोकसंगीत की दुनिया में एक मजबूत आधार की तरह लिया जाता है. उन्होंने ना सिर्फ पारंपरिक गीतों को अपनी आवाज़ दी, बल्कि कई गीत खुद लिखे और उन्हें संगीतबद्ध भी किया. उनके गीतों में गांव की मिट्टी की खुशबू है. त्योहारों की रौनक, रिश्तों की गर्माहट, प्रेम की गहराई और विरह की पीड़ा सब कुछ बहुत सहज तरीके से सुनाई देता है.

खास बात यह है कि उन्होंने लोकधुनों की मूल आत्मा को कभी टूटने नहीं दिया, लेकिन उसे आज के श्रोताओं की समझ और स्वाद से जोड़ने की कोशिश भी लगातार की. यही वजह है कि उनके गीत बुज़ुर्गों के साथ-साथ युवाओं में भी समान रूप से लोकप्रिय रहे हैं.

सात दशकों की लंबी साधना

उनकी जिंदगी सिर्फ मंच पर गाने तक सीमित नहीं रही. उन्होंने एक गुरु की भूमिका निभाते हुए सैकड़ों शिष्यों को लोकसंगीत की बारीकियां सिखाईं. कई युवा कलाकार आज भी उन्हें अपना मार्गदर्शक मानते हैं.

इसके अलावा, उन्होंने लोकगीतों को सुरक्षित रखने के लिए उनका दस्तावेजीकरण भी किया. कई पुराने गीत जो धीरे-धीरे खत्म होने की कगार पर थे, उन्हें उन्होंने रिकॉर्ड कर संरक्षित किया, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रह सकें.

सम्मान से आगे की कहानी

पद्म श्री मिलने के बाद यह बात और भी साफ हो गई है कि उनका योगदान सिर्फ संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक पूरी सांस्कृतिक धरोहर को बचाने की कोशिश है. विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे कलाकार न होते तो कई लोकपरंपराएँ समय के साथ खो जातीं.

आज जब शहरी संगीत और डिजिटल ट्रेंड्स का दबदबा बढ़ रहा है, ऐसे में भरत सिंह भारती जैसे कलाकार याद दिलाते हैं कि असली ताकत अपनी जड़ों में होती है. उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संदेश छोड़ता है कि लोकसंगीत सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि पहचान और इतिहास की आवाज़ है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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