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विशेष

1857 Revolt Indian History: 1857 की क्रांति में मेरठ के सिपाहियों ने दिल्ली पर कब्जा कर बहादुर शाह जफर को नेता चुना, लेकिन अंग्रेजों के भयानक पलटवार ने मुगल साम्राज्य का अंत कर दिया.

पुष्पा कुरूप की यह किताब दक्षिण भारत के इतिहास के सबसे विवादास्पद अध्यायों में से एक हैदर अली और टीपू सुल्तान के शासनकाल पर एक संतुलित, तथ्य-आधारित और चुनौतीपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है.

स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के प्रथम मंत्रियों ने सोमवार को एक संयुक्त समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर किए. इससे इन तीनों देशों की ओर से यूनाइटेड किंगडम (यूके) से स्वतंत्रता के लिए जनमत संग्रह कराने का इरादा स्पष्ट हो गया है.

पेरियार और अन्नादुरै के बीच आजादी के दिन और व्यक्तिगत फैसलों पर हुए मतभेदों ने तमिलनाडु की राजनीति की दिशा बदल दी और 1949 में DMK का जन्म हुआ.

महज 295 रुपये से शुरू होकर 1.21 लाख करोड़ की कंपनी बनने वाली ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज का 134 साल पुराना इतिहास. जानिए कैसे विदेशी हाथों से निकलकर यह बनी देश की सबसे बड़ी खाद्य कंपनी.

राधा अष्टमी 2026: इस बार श्रीराधा का 5254वां प्राकट्योत्सव मनेगा. BharatExpress.Com पर आज ही जान लीजिए श्रीराधा के प्राकट्य का रहस्य. 5254 बरस पहले यमुना किनारे रावल में कमल पुष्प पर प्रकट हुई थीं लाडली जी, पहली बार अपने नेत्र श्रीकृष्ण के आने पर खोले.

लाल थानहॉला की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति के राजनीतिक सफर की नहीं है, बल्कि यह मिज़ोरम के उस मुश्किल दौर और उसके पुनर्निर्माण की दास्तान है, जब राज्य ने अलगाव और हिंसा के अंधेरे से निकलकर लोकतंत्र और शांति की रोशनी को अपनाया.

जब हम दूरदर्शन के इतिहास को याद करते हैं, तो हमारे जेहन में कुछ जाने-पहचाने चेहरे और पुरानी सिग्नेचर ट्यून घूम जाती है. लेकिन उस कैमरे के पीछे, उस कंट्रोल रूम की धुंधली रोशनी में और उन भारी-भरकम मशीनों के बीच काम करने वाली महिलाओं का पसीना इस इतिहास का सबसे मजबूत स्तंभ है.

नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (12-13 सितंबर 2026) ने वैश्विक कूटनीति के पटल पर भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की एक बेहतरीन मिसाल पेश की है.

जब भी हम अंतरराष्ट्रीय मंचों और ब्रिक्स (BRICS) जैसे बड़े संगठनों की बात करते हैं, तो अक्सर हमारे दिमाग में बड़ी-बड़ी बैठकें और समझौतों के कागजात आते हैं. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लीडरशिप में भारत की ब्रिक्स कूटनीति सिर्फ प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें एक गहरी सिविलिज़ेशनल सोच दिखती है.