आजादी के 78 साल बाद नक्सल प्रभावित इस गांव में गूंजी दूरदर्शन की आवाज
आजादी के 78 साल बाद पहली बार इस गांव के लोगों ने दूरदर्शन पर देश-दुनिया की खबरें, धारावाहिक और स्थानीय फिल्में देखी. नियद नेल्ला नार गांव पूवर्ती के बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी दूरदर्शन के कार्यक्रमों को देखने के लिए घंटों टीवी सेट के पास बैठे रहे.
Explainer: वक्फ बोर्ड के अधिकारों को लेकर विवाद क्यों, आखिर मोदी सरकार को Waqf Board Act को बदलने की जरूरत क्यों पड़ी ?
आजादी के बाद देशभर में फैली वक्त संपत्तियों के प्रबंधन के लिए साल 1954 में संसद ने वक्फ एक्ट पास किया. इसके बाद से ही वक्फ बोर्ड एक सरकारी संस्था की तरह काम करने लगी.
सदन की कार्यवाही में हर दिन खर्च हो रहे 1.5 करोड़ रुपये, यूं ही बीत गए 14 दिन
25 नवंबर से संसद की शीतकालीन सत्र की शुरुआत हुई. बीते 14 दिनों की कार्यवाही में अभी तक कुछ खास नहीं हो पाया. अब संसद की कार्यवाही में मात्र 8 दिन शेष बचा है.
World Chess Championship: कैसे D Gukesh ने तोड़ा Garry Kasparov का रिकॉर्ड और बन गए सबसे कम उम्र के वर्ल्ड चैंपियन
गुकेश की जीत का राज उनकी लड़ने की क्षमता थी. जहां अन्य ग्रैंडमास्टर ड्रॉ स्वीकार कर लेते और टाई-ब्रेक में जाते, वहीं गुकेश ने हर बार जीतने की कोशिश की.
कैसे एक गरीब लड़के ने World War II की तबाही से उबरकर खड़ी कर दी दुनिया की सबसे बड़ी मोटरसाइकिल कंपनी
एक गरीब परिवार में जन्मे होंडा ने वर्ल्ड वॉर की तबाही के बाद साइकिल में छोटे इंजन लगाकर सस्ती ट्रांसपोर्ट बाइक बनाई. यह आइडिया इतना सफल रहा कि उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी मोटरसाइकिल कंपनी की नींव रख दी.
अफगानिस्तान में महिलाएं क्यों नारकीय जीवन जीने के लिए अभिशप्त हैं?
महिलाओं के खिलाफ घिनौने कृत्य अनंत काल से होते आ रहे हैं और ये आज भी जारी हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि आज समाज ने ऐसे अपराधों को अत्यधिक सामान्य मान लिया है. ऐसे अन्यायों के लिए तालिबान जैसे समूहों को दोष देना सही है, लेकिन हम भी इसके लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं.
जब एक हाथी को भीड़ के सामने दे दी गई थी फांसी, अमेरिका का ये काला इतिहास आपको झकझोर देगा
एक बेघर व्यक्ति को मारने के बदले में भीड़ ने तय किया कि हाथिनी मैरी को भी मारा जाएगा. मैरी चार्ली स्पार्क नाम के कलाकार के जगह-जगह घूमने वाले सर्कस का हिस्सा थी.
झलकारी देवी की वीरगाथा: रानी लक्ष्मीबाई की सेना प्रमुख, जिन्होंने प्राणों का बलिदान देकर अंग्रेजों से झांसी को बचाया
झलकारी बाई एक आदर्श वीरांगना थीं, जिन्होंने न सिर्फ अपनी वीरता एवं साहस से भारतीय इतिहास को रोशन किया, बल्कि महिलाओं को सशक्त और प्रेरित किया. उनका जीवन तथा बलिदान लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा.
आज ही के दिन जारी हुआ था आजाद भारत का पहला डाक टिकट, जानें कौन-कौन से टिकट किए गए थे जारी
भारत की स्वतंत्रता के अवसर पर तीन डाक टिकट जारी किए गए. उन सभी पर 15 अगस्त, 1947 की तारीख और देवनागरी लिपि में ‘जय हिंद’ शब्द अंकित थे.
रोटी से जुड़ा आजादी का वो रहस्यमय आंदोलन, जिसने अंग्रेजी हुकूमत की नाक में कर दिया था दम
1857 की क्रांति के समय रोटी से जुड़ा आंदोलन भी हुआ था, जिसने अंग्रेजों को भयभीत कर दिया था. इसने अंग्रेजों के सामने एक ऐसी पहेली खड़ी कर दी थी, जिसमें वे उलझ कर रह गए थे.





