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विशेष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौर में भारत की विदेश नीति का सबसे अहम पहलू ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ और ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ है. भारत एक ओर अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वाड के जरिए हिंद-प्रशांत में सहयोग बढ़ा रहा है, तो दूसरी ओर रूस, चीन और ग्लोबल साउथ के साथ BRICS जैसे मंचों पर भी सक्रिय है.

आचार्य विनोबा भावे की जयंती पर जानिए उस महान समाज सुधारक की कहानी, जिन्होंने महात्मा गांधी के विचारों को आगे बढ़ाते हुए भूदान आंदोलन के जरिए भूमिहीनों को जमीन दिलाने की मुहिम छेड़ी.

AI तेजी से हमारी जिंदगी और काम करने के तरीके को बदल रही है. ऐसे दौर में सवाल यह है कि मशीनों के बढ़ते प्रभाव के बीच इंसान की सबसे बड़ी ताकत क्या होगी? नितिन सेठ की किताब AI युग में मानवीय श्रेष्ठता इसी सवाल का जवाब तलाशती है.

झारखण्डे राय ने आजादी के बाद गरीबों, किसानों और मजदूरों की आवाज बनकर राजनीति की और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया.

राम सेतु भारत और श्रीलंका के बीच मौजूद प्राकृतिक भूगर्भीय संरचना है, जिसे धार्मिक परंपरा भगवान राम के नल सेतु से जोड़ती है. वैज्ञानिक अध्ययनों में समुद्र के स्तर और कोरल-रेतीली संरचनाओं के प्रमाण मिले हैं, लेकिन मानव निर्मित पुल का निर्णायक सबूत अब तक नहीं मिला.

महाभारत सिर्फ पौराणिक कथाओं का महाकाव्य नहीं है, बल्कि इसमें कई ऐसे दिव्य अस्त्रों का जिक्र है जिनके प्रभाव आधुनिक परमाणु युद्ध, रणनीतिक पक्षाघात और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर से काफी हद तक मेल खाते हैं.

महर्षि सुश्रुत की परंपरा में नाक के पुनर्निर्माण जैसी जटिल शल्य प्रक्रिया का व्यवस्थित विवरण मिलता है, जिसे रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी का शुरुआती उदाहरण माना जाता है.

Mount Kailash Mystery: माउंट कैलाश आज भी अपने पवित्र दर्जे, धार्मिक आस्था, सरकारी पाबंदियों और इस विश्वास की वजह से अछूता है कि इसके शिखर पर पैर नहीं रखा जाना चाहिए.

भारतभूमि के सबसे प्रसिद्ध महाकाव्‍य रामायण के 'उत्तर कांड' में अयोध्‍या के कुछ आमजन द्वारा कही गई बातों के चलते भगवान राम द्वारा सीताजी को वन भेजने का प्रसंग मिलता है, जो आज भी राजधर्म, कर्तव्य और करुणा को लेकर गहरे सवाल खड़े करता है.

5 हजार साल पहले कौरव-पांडवों को अस्त्र-शस्त्रों की शिक्षा देने वाले महान आचार्य द्रोण के पुत्र अश्वत्थामा को महाभारत के उस योद्धा के रूप में याद किया जाता है, जिसे परमेश्वर श्रीकृष्ण ने हजारों साल तक माथे के कोढ़ से परेशान पृथ्वी पर अकेले भटकने का श्राप दिया था.