Gaza Peace Plan Trump Ultimatum: गाजा को कट्टरपंथ से मुक्त बनाया जाएगा. 72 घंटे के भीतर हमास के द्वारा बंधक बनाए गए इजरायली बंधकों को रिहा किया जाएगा. हमास के सदस्यों को हथियार त्यागना होगा. गाजा में शांति बहाल करने की दिशा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 20 सूत्री शांति प्रस्ताव के ये कुछ अहम बिंदु हैं. अब इसी प्रस्ताव को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने हमास को कड़ी चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा है कि अगर हमास उनके इस प्रस्ताव को नहीं मानता है तो इसके परिणाम बहुत ही भयानक और दर्दनाक होंगे.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने मंगलवार को गाजा शांति प्रस्ताव पर जवाब देने के लिए हमास को 3-4 दिनों का समय दिया है. उन्होंने इस दौरान चेतावनी दी है कि उन्हें नहीं पता है कि हमास इस प्रस्ताव को मानेगा या नहीं, लेकिन अगर नहीं मानता है तो इसके नतीजे बहुत भयावह होंगे.
हमास के फैसले का इंतजार
डोनाल्ड ट्रंप के इस प्रस्ताव को इजरायल और अरब देशों के नेताओं ने हरी झंडी दे दी है. अब सभी देश हमास के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस प्रस्ताव के सौदेबाजी के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव में सौदेबाजी की गुंजाइश बेहद कम है.
डोनाल्ड ट्रंप का क्या है प्रस्ताव?
इजरायली फोर्सेज के द्वारा गाजा में की जा रही कार्रवाई को लेकर अरब मुल्क अमेरिका पर इजरायल को युद्ध रोकने के लिए मनाने का लगातार दबाव बना रहे थे. इसी के तहत सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की. इसके बाद व्हाइट हाउस ने ट्रंप के प्रस्तावित शांति योजना को जारी किया. जिसमें उन्होंने इजरायल-हमास युद्ध को समाप्त कर इलाके में शांति लाने का प्रयास किया है. वहीं व्हाइट हाउस के द्वारा जारी किए गए इस शांति योजना का इजरायल ने भी समर्थन किया है. उधर अरब देशों ने भी अमेरिका के इस शांति प्रस्ताव का समर्थन कर दिया है. हालांकि ये अभी तक स्पष्ट नहीं है कि हमास इस शांति प्रस्ताव को मानेगा या नहीं.
डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्रस्ताव का मुख्य बिंदु ये है…
- गाजा को कट्टरपंथ और आतंकवाद मुक्त क्षेत्र बनाया जाएगा. ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वो अपने पड़ोसियों के लिए कोई खतरा नहीं है.
- गाजा के नागरिकों के हित में गाजा का पुनर्निर्माण किया जाएगा.
- दोनों पक्षों की सहमति के बाद तत्काल युद्ध को समाप्त कर दिया जाएगा. इजरायली सेना को पीछे हटना होगा और बंधकों की रिहाई करनी होगी. इस दौरान किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधियों को स्थगित करना पड़ेगा.
- इजरायल के द्वारा समझौता सार्वजनिक रूप से स्वीकार किये जाने के बाद उसे 72 घंटे के भीतर उसे सभी बंधकों को रिहा करना होगा. चाहे वो जीवित हों या मृत.
- इजरायल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 250 कैदियों और 1700 गाजा वासियों को भी रिहा करना होगा. इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं. अगर हमास किसी मृत इजरायली का शव लौटाएगा तो इजरायल को भी मृत गाजावासियों के शव लौटाना होगा. प्रत्येक इजरायली बंधक के अवशेष लौटाने के बदले इजरायल के द्वारा 15 मृत गाजावासियों को अवशेष लौटाना पड़ेगा.
- जो हमास सदस्य इजरायल के साथ सह-अस्तित्व को स्वीकार करेंगे और अपना हथियार डालेंगे, उन्हें माफी दी जाएगी. वहीं जो गाजा छोड़ना चाहेंगे उन्हें भी सुरक्षित रूप से निकलने दिया जाएगा.
- शांति समझौते के तुरंत बाद गाजा में पूर्ण रूप से मानवीय सहायता भेजी जाएगी. इसमें गाजा का पुनर्निर्माण भी शामिल है.
- गाजा में भेजी जाने वाली सहायता का वितरण संयुक्त राष्ट्र, रेड क्रीसेंट और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की निगरानी में होगा. वहीं राफा क्रॉसिंग को खोलने का निर्णय 19 जनवरी 2025 के समझौते के तहत किया जाएगा.
- गाजा में कानून व्यवस्था और अन्य चीजों को सही रखने के लिए बनाया जाने वाला प्रशासन एक अस्थाई, तकनीकी और गैर-राजनीतिक फिलिस्तीनी समिति को दिया जाएगा. इस प्रशासन की निगरानी ‘बोर्ड ऑफ पीस’ करेगा. जिसका अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रंप होंगे और इसमें पूर्व ब्रिटिश पीएम टोनी ब्लेयर सहित विश्व के अन्य नेता सदस्य के तौर पर शामिल होंगे.
- गाज़ा के लिए एक नई योजना बनाई जाएगी, जिसमें वहां के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास पर खास ध्यान दिया जाएगा. इस काम में वही विशेषज्ञ शामिल होंगे, जिन्होंने पश्चिम एशिया के बड़े और आधुनिक शहर बनाने में योगदान दिया है.
- गाज़ा में एक खास आर्थिक ज़ोन बनाया जाएगा, जहां कारोबारियों को टैक्स और व्यापार पर अलग तरह की रियायतें मिलेंगी. इससे रोज़गार और निवेश बढ़ाने की कोशिश की जाएगी.
- इस योजना में किसी भी व्यक्ति को गाज़ा छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा. अगर कोई जाना चाहे या बाहर से लौटकर आना चाहे तो उसे पूरी आज़ादी होगी.
- लेकिन गाज़ा के शासन में हमास और दूसरे लड़ाकू गुटों को कोई भूमिका नहीं मिलेगी. पूरे इलाके को हथियारों से मुक्त किया जाएगा और इसकी निगरानी अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक करेंगे.
- इस समझौते की गारंटी क्षेत्रीय देश देंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हमास या दूसरे गुट नियम तोड़कर गाज़ा को फिर से खतरे में न डालें.
- गाज़ा में शांति बनाए रखने के लिए अमेरिका, अरब देशों और अंतरराष्ट्रीय सहयोगी मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) भेजेंगे. यह बल स्थानीय फिलिस्तीनी पुलिस को ट्रेनिंग देगा और सुरक्षा का जिम्मा संभालेगा.
- इज़रायल ने साफ कर दिया है कि वह गाज़ा पर कब्ज़ा नहीं करेगा और न ही इसे अपने देश में मिलाएगा. जब ISF वहां हालात संभाल लेगा तो धीरे-धीरे इज़रायली सेना (IDF) भी वहां से हट जाएगी. बस सीमावर्ती इलाकों में तब तक उनका नियंत्रण रहेगा जब तक पूरी तरह सुरक्षा की गारंटी न हो जाए.
- अगर हमास इस प्रस्ताव को ठुकराता है तो फिर मदद और विकास की योजनाएं सिर्फ उन इलाकों में लागू होंगी जिन्हें IDF, ISF के हवाले करेगा.
- इसके साथ ही गाज़ा में शांति, भाईचारा और आपसी समझ बढ़ाने के लिए संवाद की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी.
- अगर यह पूरा पुनर्निर्माण सफल रहा और फिलिस्तीनी प्रशासन अपने सुधार लागू कर पाया तो फिलिस्तीनियों के लिए आत्मनिर्णय और अपने स्वतंत्र देश की राह साफ हो सकती है.
- अमेरिका इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाएगा और इज़रायल व फिलिस्तीनियों के बीच राजनीतिक बातचीत शुरू कराएगा ताकि दोनों मिलकर शांति और तरक्की की ओर बढ़ सकें.
-भारत एक्सप्रेस
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