वॉशिंगटन डीसी में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर (S jaishankar) ने अमेरिका की प्रस्तावित नीतियों और वैश्विक मुद्दों पर भारत का स्पष्ट रुख रखा. अमेरिकी कांग्रेस में रूस से तेल आयात पर 500% टैरिफ लगाने के प्रस्ताव पर पूछे गए सवाल के जवाब में डॉ. जयशंकर (S jaishankar) ने कहा कि भारत इस विकास पर करीबी नजर रख रहा है. उन्होंने बताया कि भारत सरकार, अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम और अन्य संबंधित अधिकारियों से इस विषय पर लगातार संपर्क में है. ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े भारत के हितों को अमेरिका तक पहुंचा दिया गया है और अगर यह प्रस्ताव भारत पर प्रभाव डालता है, तो समय आने पर उचित प्रतिक्रिया दी जाएगी.
आतंकवाद पर क्या बोले S jaishankar?
आतंकवाद को लेकर वैश्विक समुदाय के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि कई देश तब तक सख्त रुख नहीं अपनाते जब तक खुद उनके नागरिक इसका शिकार न बनें. इसके विपरीत भारत ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ एक सैद्धांतिक और सुसंगत नीति अपनाई है, चाहे हमले देश के भीतर हों या बाहर. उन्होंने कहा कि भारत की कूटनीति का एक अहम हिस्सा यही है कि वह अन्य देशों को इस दिशा में प्रेरित करे और वैश्विक स्तर पर एकजुटता बनाई जाए.
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान और इज़राइल के बीच संघर्षविराम पर की गई टिप्पणी को लेकर विदेश मंत्री ने कहा कि उस समय जो हुआ, उसका रिकॉर्ड बिल्कुल स्पष्ट है. उन्होंने कहा कि उस सीज़फायर की प्रक्रिया दोनों देशों के डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) के बीच बातचीत से तय हुई थी.
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दक्षिण चीन सागर को लेकर भी विदेश मंत्री (S jaishankar) ने चिंता जताई और कहा कि यह क्षेत्र सभी Quad देशों के लिए सामरिक और व्यापारिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग शांतिपूर्ण बना रहे, यह हम सभी की साझा प्राथमिकता है. डॉ. एस. जयशंकर के इन बयानों ने न सिर्फ भारत की विदेश नीति की स्पष्टता को दर्शाया, बल्कि यह भी दिखाया कि भारत अपने हितों के मुद्दे पर अब कहीं अधिक मुखर और आत्मनिर्भर भूमिका में है.
-भारत एक्सप्रेस
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