US Israel Iran Conflict: अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक गिरते हुए टावर की तस्वीर शेयर की, जिसे न्यूज एजेंसी AP ने चाबहार पोर्ट का बताया है. चूंकि इस पोर्ट में भारत ने भारी-भरकम पैसा लगा रखा है, इसलिए इस खबर के आते ही भारत में भी चिंता की लकीरें खिंच गईं. हालांकि, कूटनीतिक और रणनीतिक लिहाज से भारत के लिए राहत की बात यह है कि इस हमले में भारतीय निवेश को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर वहां हुआ क्या है.
भारतीय निवेश सुरक्षित
अमेरिकी हमलों का शिकार बना यह ढांचा दरअसल ईरान का एक तटीय निगरानी और समुद्री ट्रैफिक कंट्रोल टावर था. ईरान इसका इस्तेमाल कमर्शियल जहाजों और अपने अर्धसैनिक बल (IRGC) की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए करता था.
भारत का निवेश क्यों सुरक्षित है?
भारत ने चाबहार पोर्ट के विकास के लिए लगभग 120 मिलियन डॉलर यानी की करीब 1,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है. लेकिन यह निवेश ‘शाहिद बेहेश्ती’ टर्मिनल में क्रेन, कार्गो हैंडलिंग और बाकी बुनियादी ढांचे के लिए है.
वहीं, जिस टावर को अमेरिकी हमले में गिराया गया है, वह ‘शाहिद कलंतरी’ पोर्ट वाले हिस्से में था, जो भारत के काम वाले एरिया से बिल्कुल अलग है. इसलिए भारतीय प्रोजेक्ट्स को कोई आंच नहीं आई है.
सीजफायर के बाद फिर भड़की आग
पिछले महीने दोनों देशों के बीच सीजफायर यानी युद्धविराम हुआ था, लेकिन वह अब पूरी तरह बेअसर हो चुका है. अमेरिकी सेना लगातार छठी रात से ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रही है. इसके जवाब में शुक्रवार को तेहरान (ईरान) ने भी दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर नए सिरे से हमले किए हैं. दोनों तरफ से हो रही इस ताबड़तोड़ गोलाबारी ने पूरे इलाके को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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