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बड़ी खबर: बांग्लादेश में कैद किए गए हिंदू संत चिन्मय दास को 5 महीनों बाद जमानत का आदेश, जेल से बाहर आएंगे

बांग्लादेश में देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को हाईकोर्ट से 5 महीने बाद जमानत मिल गई है.

Chinmoy Das Bail News

चिन्मय कृष्ण दास.

Chinmoy Das Bail News: बांग्लादेश की हाईकोर्ट ने देशद्रोह के आरोप में पिछले पांच महीनों से जेल में बंद हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को जमानत दे दी है. जमानत याचिका उनके वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने 23 अप्रैल को दाखिल की थी.

हालांकि, अभी उनकी रिहाई पर पूरी तरह से मुहर नहीं लगी है. यदि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगाता है, तो चिन्मय दास जल्द ही जेल से बाहर आ सकते हैं. बांग्लादेशी मीडिया ‘द डेली स्टार’ के अनुसार, चिन्मय पर राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का आरोप है, जिस आधार पर 25 नवंबर 2024 को उनके खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की गई थी.

एयरपोर्ट से की गई थी गिरफ्तारी

ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से 25 नवंबर को उन्हें उस समय गिरफ्तार किया गया जब वे चटगांव के लिए रवाना हो रहे थे. इस दौरान इस्कॉन के कुछ सदस्य भी मौके पर मौजूद थे. उन्होंने दावा किया कि गिरफ्तारी के समय पुलिस ने कोई वारंट नहीं दिखाया और बस कहा कि “थोड़ी बात करनी है”, फिर उन्हें एक माइक्रोबस में बैठाकर ले जाया गया.

ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की डिटेक्टिव ब्रांच (डीबी) के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रेजाउल करीम मल्लिक ने बताया था कि गिरफ्तारी पुलिस के विशेष अनुरोध पर की गई थी. बाद में चिन्मय दास को कानूनी प्रक्रिया के तहत संबंधित थाने को सौंप दिया गया.

कौन हैं चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी?

चिन्मय प्रभु, जिनका असली नाम चंदन कुमार धर है, चटगांव इस्कॉन के प्रमुख हैं. 5 अगस्त 2024 को जब बांग्लादेश में हिंसा भड़क उठी थी और प्रधानमंत्री शेख हसीना देश छोड़कर चली गई थीं, तब हिंदू समुदाय के खिलाफ कई हमले हुए.

इन्हीं घटनाओं के बीच ‘सनातन जागरण मंच’ का गठन हुआ, जो हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की आवाज बनने का दावा करता है. चिन्मय दास इस मंच के प्रवक्ता बने और उन्होंने चटगांव, रंगपुर समेत कई इलाकों में जनसभाएं कीं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए.


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-भारत एक्सप्रेस



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