India Indonesia Relations
India Indonesia Relations: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता ने भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई गति देने का संकेत दिया है. संयुक्त प्रेस वक्तव्य में प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि दोनों देश अब केवल पारंपरिक मित्र नहीं, बल्कि 21वीं सदी की चुनौतियों और अवसरों के साझेदार के रूप में आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच हुई नई पहलें न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेंगी, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव छोड़ेंगी.
प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया में मिले गर्मजोशी भरे स्वागत और वहां के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए राष्ट्रपति प्रबोवो, इंडोनेशिया की सरकार और वहां की जनता के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों और भारत-इंडोनेशिया की सदियों पुरानी मित्रता का सम्मान है.
उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है. विकास, सुरक्षा, तकनीक, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में दोनों देशों ने अपने रिश्तों को और व्यापक बनाने का निर्णय लिया है.
रक्षा और समुद्री सुरक्षा को मिलेगा नया आयाम
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि हिंद महासागर क्षेत्र में बदलते रणनीतिक परिदृश्य को देखते हुए भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा सहयोग को और मजबूत करने का फैसला किया है. दोनों देशों के बीच रक्षा आदान-प्रदान, रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति बनी है.
इसके साथ ही दोनों देशों के तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) समुद्री सुरक्षा, समुद्री कानूनों के पालन और हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त रूप से कार्य करेंगे. ब्लू इकोनॉमी, बंदरगाहों के विकास और समुद्री व्यापार को भी नई प्राथमिकता दी जाएगी.
गरीब कल्याण और स्वास्थ्य क्षेत्र में साझेदारी
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया दोनों ही अपने नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं. भारत ने अपने सार्वजनिक वितरण प्रणाली और मिड-डे मील जैसी सफल योजनाओं के अनुभव इंडोनेशिया के साथ साझा किए हैं और अब इस सहयोग को और आगे बढ़ाया जाएगा.
स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए समझौतों के तहत भारतीय दवाइयों की बेहतर उपलब्धता इंडोनेशिया में सुनिश्चित की जाएगी. साथ ही डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण में भी भारत सहयोग करेगा.
कृषि क्षेत्र में भारत द्वारा विकसित गेहूं के उन्नत बीज इंडोनेशिया को उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वहां की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी. दोनों देश टिकाऊ खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों के आदान-प्रदान पर भी मिलकर काम करेंगे.
तकनीक, स्टार्टअप और शिक्षा पर विशेष जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया युवा देशों की श्रेणी में आते हैं और तकनीक भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति है. इसी सोच के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), दूरसंचार और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझौते किए गए हैं. दोनों देशों ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को जोड़ने और नवाचार को बढ़ावा देने पर भी सहमति जताई है.
शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) बेंगलुरु अपना परिसर इंडोनेशिया में स्थापित करेगा. इससे केवल इंडोनेशिया ही नहीं, बल्कि पूरे आसियान क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली प्रबंधन शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी.
अंतरिक्ष और महत्वपूर्ण खनिजों में नई साझेदारी
अंतरिक्ष क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को और मजबूत करने के लिए दोनों देशों ने संयुक्त अनुसंधान, तकनीक साझा करने और क्षमता निर्माण पर नए निर्णय लिए हैं.
इसके अलावा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स), स्टील और रेयर अर्थ मैग्नेट के क्षेत्र में भी नई साझेदारी की शुरुआत की गई है. इससे दोनों देशों के उद्योगों को भविष्य की आवश्यक तकनीकों के लिए मजबूत आधार मिलेगा.
डिजिटल भुगतान से व्यापार और पर्यटन को मिलेगा लाभ
प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) प्रणाली को इंडोनेशिया के डिजिटल भुगतान नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. इससे दोनों देशों के व्यापारियों, पर्यटकों और आम नागरिकों को लेन-देन में आसानी होगी तथा व्यापार और पर्यटन दोनों को नई गति मिलेगी.
साझा सांस्कृतिक विरासत बनेगी संबंधों की नई पहचान
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया का संबंध केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत पर आधारित है.
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ योग्याकार्ता स्थित एक हजार वर्ष पुराने प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण परियोजना की शुरुआत की जाएगी. यह मंदिर दोनों देशों की साझा सभ्यता और सांस्कृतिक जुड़ाव का जीवंत प्रतीक है.
साथ ही गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की ऐतिहासिक इंडोनेशिया यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दोनों देश पूरे वर्ष विशेष कार्यक्रम आयोजित करेंगे. इस अवसर को “टैगोर और देवान्तरा सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कूटनीति वर्ष” के रूप में मनाया जाएगा, जिससे शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई ऊर्जा मिलेगी.
लोकतंत्र और वैश्विक मुद्दों पर समान सोच
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों और विविधता में एकता दोनों देशों की साझा पहचान है. इसी दिशा में दोनों देशों के निर्वाचन आयोगों के बीच हुए समझौते से चुनावी प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सहयोग को मजबूती मिलेगी.
वैश्विक मुद्दों पर भारत और इंडोनेशिया की सोच में भी व्यापक समानता है. प्रधानमंत्री ने दोहराया कि भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आसियान की केंद्रीय भूमिका का लगातार समर्थन करता है. उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में संवाद और कूटनीति ही स्थायी समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम हैं.
फिलिस्तीन के मुद्दे पर भारत ने एक बार फिर दो-राष्ट्र समाधान और दीर्घकालिक शांति के समर्थन की अपनी नीति दोहराई.
भविष्य की साझेदारी का भरोसा
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत और इंडोनेशिया का संबंध आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगा. उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत, आपसी विश्वास और विकास की समान आकांक्षाएं भविष्य की नई साझेदारी की मजबूत नींव हैं.
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प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के “विकसित भारत” के संकल्प और इंडोनेशिया के “इंडोनेशिया एमास” (Golden Indonesia) के विजन को मिलकर साकार करने की दिशा में दोनों देश एक नए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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