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कतर की मेज पर फिसली डील! किन शर्तों पर आकर उलझा ईरान-अमेरिका समझौता?

Iran US Talks: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने के लिए कतर की मध्यस्थता में बातचीत हुई, लेकिन प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी.

Iran US Talks- Iran America Talks

किन शर्तों पर आकर उलझ गई ईरान-अमेरिका की डील

Iran US Talks: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव (iran us conflict) कम कराने की कतर की कोशिशों को एक बार फिर झटका लगा है. इस सप्ताह हुई उच्चस्तरीय बातचीत में दोनों देशों के बीच किसी ठोस समझौते पर सहमति नहीं बन सकी. बातचीत से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्ष अपनी-अपनी मांगों पर कायम हैं और फिलहाल पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहे हैं.

इस गतिरोध ने क्षेत्र में एक बार फिर सैन्य टकराव की आशंका बढ़ा दी है. अमेरिकी अधिकारियों के बीच ऐसी चर्चा भी है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान का विकल्प चुन सकते हैं. हालांकि, कतर ने अभी अपनी मध्यस्थता बंद नहीं की है और बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी है.

कई घंटे चली ईरानी पक्ष से बातचीत

सोमवार को कतर के प्रमुख मध्यस्थ अली अल-थवादी ने न्यूयॉर्क में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और उनकी टीम के साथ लंबी बैठक की. बताया जाता है कि बैठक में कतर की ओर से तैयार किए गए दो पन्नों के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई.

इस प्रस्ताव में दोनों देशों की प्रमुख चिंताओं को जगह देने की कोशिश की गई थी. ईरान अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी पूरी तरह हटाने की मांग कर रहा है, जबकि अमेरिका चाहता है कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए ठोस कदम उठाए.

इसके बाद अल-थवादी वॉशिंगटन पहुंचे और ट्रंप के दूत जेरेड कुशनर समेत अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की. बैठक के एक हिस्से में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल हुए. हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस मुलाकात को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की.

उम्मीद जगी, फिर बदल गया माहौल

सोमवार सुबह तक अमेरिकी अधिकारियों की ओर से बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत दिए जा रहे थे. मीडिया ब्रीफिंग में दावा किया गया कि चर्चा रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और ईरान परमाणु मुद्दे पर कुछ लचीलापन दिखा सकता है.

यह भी कहा गया कि परमाणु कार्यक्रम सीमित करने की दिशा में ईरान ठोस कदम उठाता है तो अमेरिका प्रतिबंधों में राहत देने और फ्रीज किए गए ईरानी फंड को जारी करने पर विचार कर सकता है. लेकिन कुछ ही घंटे बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने ईरान को कोई प्रस्ताव नहीं दिया है. इससे बातचीत को लेकर पैदा हुई उम्मीदों पर पानी फिर गया.


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दोनों तरफ से अलग-अलग दावे

सूत्रों के अनुसार, वार्ता में कोई सार्थक प्रगति नहीं हुई. ईरान का कहना है कि वह तभी परमाणु मुद्दे पर रियायतों पर विचार करेगा, जब अमेरिका पिछले साल जून के समझौते पर लौटने को तैयार हो.

दूसरी ओर, ट्रंप ने कहा कि ईरान बेहद मुश्किल स्थिति में है और मौजूदा प्रयासों का उद्देश्य उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है. ऐसे में फिलहाल कूटनीतिक समाधान की राह आसान नजर नहीं आ रही है.

-भारत एक्सप्रेस



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