Bangladesh Border Tension
Bangladesh Border Tension: अवैध घुसपैठ को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच टेंशन चरम पर है. इसी बीच भारतीय खुफिया एजेंसियों को ऐसी जानकारी मिली है, जिसने बंगाल में अवैध घुसपैठ को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है. मिली जानकारी के मुताबिक जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को कथित तौर पर बांग्लादेश भेजने के खिलाफ बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं.
ये विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे जिलों में होने वाले हैं. इसके अलावा जमात-ए-इस्लामी 15 जून को एक रैली और जुलूस निकालने जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरान हिंसा भड़काने की कोशिशें होंगी, जो भारत में भी फैल सकती हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स में एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान बांग्लादेश की कुछ पार्टियां भी घुसपैठ के खिलाफ भारत के कार्रवाई के खिलाफ प्रचार कर सकती हैं. जो ना सिर्फ भ्रामक हैं बल्कि गलत भी हैं.
जमात फैला रहा झूठ
अधिकारी के मुताबिक भारत सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन कर रहा है. लेकिन जमात ने घुसपैठ के आरोप लगाए हैं. इसके अलावा बीएसएफ पर सीमा पर बांग्लादेशी नागरिकों की हत्या का भी आरोप लगाया है.
इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि जो कहानी और जानकारी दी जा रही है, वो ना सिर्फ झूठ है बल्कि बेबुनियाद भी है. इसका मकसद लोगों को भारत के खिलाफ भड़काना और बीएसएफ को निशाना बनाना है.
गठबंधन ने तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार पर इस मुद्दे पर बहुत नरम रवैया अपनाने और भारत के साथ मिली होने का भी आरोप लगाया है.
बांग्लादेश की पार्टियां फैलाना चाहती तनाव
खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश में 11 पार्टियों के गठबंधन के दो मुख्य मकसद हैं. इनका एक मकसद गलत जानकारी फैलाने वाला अभियान चलाना और दूसरा भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव पैदा करना है.
इस साल की शुरुआत में तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद, भारत और बांग्लादेश दोनों ने अपने संबंध ठीक किए हैं और अलग-अलग मुद्दों पर काम कर रहे हैं. अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश ने संकेत दिया है कि वह अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध चाहता है और भारत की रणनीतिक अहमियत को समझता है.
हालांकि, जमात का रुख भारत समर्थक नहीं माना जाता है. भारतीय सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के बाद जमात ने पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के साथ मिलकर भारत में बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासन को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई थी.
अधिकारियों का आरोप है कि इसका उद्देश्य जनसांख्यिकीय संतुलन को प्रभावित करना, सांप्रदायिक तनाव बढ़ाना, अपराध नेटवर्क को मजबूत करना और स्थानीय रोजगार के अवसरों पर असर डालकर आर्थिक दबाव पैदा करना था.
एजेंसियां रख रही कड़ी नजर
खुफिया एजेंसियां योजना बनाकर होने वाले विरोध प्रदर्शनों पर कड़ी नजर रख रही हैं. विरोध प्रदर्शन की योजना सीमा से सटे उन जिलों के लिए तैयार की जा रही है, जहां जमात का काफी प्रभाव है. हाल के चुनावों में, पार्टी ने भारत की सीधी सीमा से लगे जिलों में अपनी 68 में से 51 सीटें जीतीं.
भारतीय एजेंसियों ने पहले इन चुनावी फायदों पर चिंता जताई थी और सीमा पर ज्यादा चौकसी बरतने की सलाह दी थी. सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ाते हुए, स्टूडेंट-लीड वाली नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) ने कथित तौर पर हुई घुसपैठ के खिलाफ मानवीय ढाल बनाने की मांग की है.
हाई अलर्ट पर है भारत
फेक नैरेटिव और सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिशें भारतीय एजेंसियों के लिए एक बड़ी चिंता बन गई हैं. हालांकि, एक अधिकारी ने कहा कि भारत अभी भी बहुत हाई अलर्ट पर है और ऐसी किसी भी कोशिश को नाकाम कर दिया जाएगा.
इस बीच, भारत ने स्पष्ट किया है कि किसी के साथ कोई जबरदस्ती नहीं की जा रही है. सिर्फ तय कानूनी तरीकों और द्विपक्षीय समझौतों के जरिए ही गैर-कानूनी विदेशी नागरिकों को वापस भेजा जा रहा है.
हाल ही में पश्चिम बंगाल और असम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की भारी जीत के बाद, गैर-कानूनी बांग्लादेशी इमिग्रेंट्स को वापस भेजने पर फिर से फोकस किया गया है.
अवैध प्रवासन के कारण बदल रहा डेमोग्राफी
अधिकारियों के अनुसार, यह मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि अवैध प्रवासन के कारण कथित तौर पर जनसांख्यिकीय बदलाव, आतंकी संगठनों द्वारा भर्ती, सस्ते श्रम के चलते स्थानीय लोगों के रोजगार पर असर, जाली मुद्रा से जुड़े नेटवर्क और मवेशियों की तस्करी जैसी समस्याओं को बढ़ावा मिला है.
जमात यह कहानी बनाने की कोशिश कर रही है कि भारतीय सुरक्षा बलों ने लोगों को जबरदस्ती घुसाया और कथित तौर पर हत्याएं कीं, जबकि भारत ने ऐसे आरोपों से इनकार किया और कहा कि गैर-कानूनी बांग्लादेशी इमिग्रेंट्स को वापस भेजने का काम कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही किया जा रहा है.
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भारत ने बांग्लादेश से राष्ट्रीयता सत्यापित करने में तेजी लाने की भी अपील की है ताकि वापस भेजने की प्रक्रिया आसानी से आगे बढ़ सके. अधिकारियों का कहना है कि भारतीय कानून के अनुसार देश में रहने वाले गैर-कानूनी विदेशी नागरिकों को तय कानूनी प्रक्रियाओं और द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार वापस भेजा जाना चाहिए.
-भारत एक्सप्रेस
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