Balen Shah Nepal: नेपाल के आम चुनावों में हुए मतदान को लेकर वोटों की गिनती जारी है. शुरुआती रुझानों में काठमांडू के मेयर बालेन शाह की पार्टी (राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी) बढ़त बनाए हुए है. RSP ने एक सीट पर जीत हासिल की है, वहीं 105 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. 165 सीटों पर हुए इस चुनाव में लैंडस्लाइड विक्ट्री की तरफ बढ़ते बालेन शाह युवाओं के पसंदीदा हैं. पिछले साल सितंबर 2025 में हुए जेन-Z आंदोलन के बाद युवाओं की मांग थी कि बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनाया जाए. नेपाल के प्रधानमंत्री की रेस में सबसे आगे दिख रहे बालेन शाह कौन हैं और क्यों नेपाल के युवा उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं?
27 अप्रैल 1990 में नेपाल की राजधानी काठमांडू में जन्मे बालेन शाह का असली नाम बालेंद्र शाह है. उन्होंने भारत के नागपुर में मौजूद VNIT से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. साल 2023 में दुनिया की प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने उन्हें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली सूची में शामिल किया था. वहीं न्यूयॉर्क टाइम्स ने उनकी प्रोफाइल स्टोरी तक कवर की थी.
रैप में गरीबी-भ्रष्टाचार के उठाते थे मुद्दा
काठमांडू का मेयर बनने से पहले बालेंद्र शाह नेपाल में एक रैपर के तौर पर मशहूर हो चुके थे. उनके रैप में गरीबी, पिछड़ेपन, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे उठाये जाते थे. वो कभी छतों पर रैप बैटल का आयोजन करते थे, तो कभी म्यूजिक वीडियो बनाते थे.
आम लोगों की समस्याओं से जुड़े मुद्दे उठाने की वजह से बालेंद्र शाह नेपाल के युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो गए. खासकर रैप के अंदर नेताओं की बेइज्जती वाले हिस्से को युवा काफी पसंद करते थे. कई युवा बालेंद्र शाह को फॉलो करते हुए रैप करने लगे. बालेन की फैन फॉलोइंग लगातार बढ़ने लगी. फिर आता है साल 2022, जहां भ्रष्टाचार और गरीबी की वजह से परेशान आम आदमी की मदद करने के उद्वेश्य से बालेन राजनीति में उतरने का मन बना लेते हैं.
रैपर से मेयर तक का सफर
इसी साल काठमांडू मेयर पद के लिए चुनाव होना था. राजनीति में अपनी पकड़ बनाने के लिए बालेन युवाओं को टारगेट करना शुरू किया. वो काले ब्लेजर, काली जींस और आंखों पर काला चश्मा लगाकर युवाओं और जनता से मिलना शुरू कर दिया. इसी बीच मई में काठमांडू मेयर पद के लिए चुनाव की घोषणा की गई और बालेन ने मेयर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया.
बता दें कि, काठमांडू के मेयर की वहीं हैसियत है जो भारत में मुंबई के मेयर की. इनकी ताकत किसी केंद्रीय मंत्री से भी ज्यादा मानी जाती है. ऐसे में जब बालेन चुनाव प्रचार के लिए निकले तो लोग चौंक गए. क्योंकि उन्हें कभी भी किसी नेता को जींस और ब्लेजर में चुनाव प्रचार करते नहीं देखा था.
बालेन शाह किसी पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ने के बजाय निर्दलीय उतरना ज्यादा बेहतर समझा. इसके पीछे उनका तर्क था कि वो उन नेताओं के नीचे नहीं काम करना चाहते थे जिन्हें वो भ्रष्टाचार और नेपाल में गरीबी की वजह मानते थे. काठमांडू मेयर चुनाव में 33 साल के बालेन शाह ने बड़े-बड़े महारथियों को हरा दिया. वह मेयर का चुनाव जीतने वाले पहले नेता बने.
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जेन-Z आंदोलन से बने नेपाल के आइकन
8 सितंबर 2025 को नेपाल में हुआ जेन-Z आंदोलन बालेन शाह की राजनीतिक करियर का टर्निंग पॉइंट रहा. इस प्रदर्शन ने नेपाल की राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया. इसमें बालेन शाह युवाओं के सबसे बड़े आइकन बनकर उभरे.
4 सितंबर 2025 को नेपाल की सरकार ने देश में चल रहे 26 प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे-फेसबुक, इंस्टाग्राम और टिकटॉक आदि पर अस्थाई बैन लगा दिया. सरकार ने इसे जहां रेगुलेटरी नॉन कंप्लायंस बताया, तो वहीं युवाओं ने इसे सेंसरशिप और असहमति दबाने की कोशिश बताया.
सरकार के इस बैन ने युवाओं की असहमति को जल्द ही एंटी करप्शन, एंटी एस्टेब्लिशमेंट और बेरोजगारी के मुद्दों में बदल दिया. हजारों युवा पोखरा, काठमांडू और चितवन जैसे नेपाल के प्रमुख शहरों में सड़कों पर उतर आए और प्रदर्शन करने लगे.
जेन-Z आंदोलन को बालेन ने दिया समर्थन
8-9 सितंबर को पुलिस ने युवाओं को रोकने के लिए डायरेक्ट फायरिंग करना शुरू कर दिया. जिसमें 77 लोग मारे गए और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए. पुलिस की फायरिंग ने प्रदर्शन को और हिंसक बना दिया. जो प्रदर्शन पहले युवाओं का था अब उसमें आम लोग भी शामिल हो गए. जिसके बाद संसद भवन, सरकारी दफ्तरों और होटलों को आग के हवाले कर दिया गया. युवाओं के इस प्रदर्शन को काठमांडू के मेयर ने समर्थन दिया और सोशल मीडिया से ही युवाओं को गाइड किया.
उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट कर कहा कि मैं उम्र की वजह से नहीं जा सकता, लेकिन इस प्रदर्शन को मेरा पूरा समर्थन है. उन्होंने राजनीतिक पार्टियों से आंदोलन को हाईजैक न करने की अपील की.
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जेन-Z आंदोलन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को सत्ता छोड़कर भागने पर मजबूर कर दिया. वो हेलीकॉप्टर के माध्यम से काठमांडू से भाग निकले और अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
इन प्रदर्शनों के बाद बालेन शाह को युवाओं का जबरदस्त समर्थन हासिल हुआ. बालेन ने जनवरी 2026 में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी जॉइन की. जिसके बाद पार्टी ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया.
जेन-Z आंदोलन ने नेपाल की पूरी राजनीति को हिला दिया और इस क्रांति के सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे बालेन शाह. एक रैपर से मेयर और अब संभावित प्रधानमंत्री बनने जा रहे बालेन शाह युवाओं की ताकत और उनके उम्मीद के प्रतीक हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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