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नेपाल की बाढ़ में बहकर आया चीनी बारूद…तिब्बत में काटे पहाड़, तबाही के लिए ड्रैगन जिम्मेदार?

नेपाल के गोरखा में त्रिशूली नदी के किनारे बाढ़ के पानी के साथ भारी मात्रा में विस्फोटक बहकर आने से हड़कंप मच गया.

नेपाल की बाढ़ में विस्फोटक मिलने से चीन पर उठे सवाल

Chinese Explosives found in Nepal Flood: भयानक बाढ़ और तबाही से जूझ रहे नेपाल में अब एक ऐसा सनसनीखेज वाकया सामने आया है जिसने ड्रैगन (चीन) की नापाक हरकतों की पोल खोलकर रख दी है. दरअसल गोरखा के शहीद लखन ग्रामीण नगरपालिका-3 स्थित त्रिशूली नदी के किनारे लावारिस हालत में भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ मिले हैं. नेपाली सेना की रुद्रध्वज बटालियन ने कड़ी मशक्कत के बाद इन विस्फोटकों को सुरक्षित रूप से नष्ट किया.

लेकिन इस घटना के बाद नेपाल के पत्रकारों, खोजी समूहों और एक्सपर्ट्स ने चीन पर सीधे तौर पर ‘पर्यावरण विनाश’ और ‘मानव निर्मित आपदा’ फैलाने का बड़ा आरोप लगा दिया है.

जानिए क्या है पूरा मामला?(Chinese Explosives found in Nepal Flood)

रुद्रध्वज बटालियन के कंपनी अधिकारी बिरोध रिजाल के मुताबिक, ये जानलेवा विस्फोटक रसुवा से आई भयंकर बाढ़ के पानी में बहकर आए थे. गुरुवार को नदी किनारे मिलने के बाद जब पहले दिन इन्हें नष्ट करने की कोशिश नाकाम रही, तो अगले दिन सेना की स्पेशल टीम ने इसे ब्लास्ट कर डिफ्यूज किया. इस बारूद के मिलने के बाद नेपाल में हड़कंप मच गया है कि आखिर चीन सीमा के पास इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक कहां से आए?

तबाही के लिए चीन जिम्मेदार?

SAARC जर्नलिस्ट फोरम के अध्यक्ष राजू लामा ने मीडिया से बातचीत में विस्फोटक मिलने की पुष्टि करते हुए सनसनीखेज आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि रसुवा की भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा 626 के पार पहुंच गया है, जिनमें से 553 से ज्यादा शव बरामद हो चुके हैं.

बता दें कि यह बारूद चीन का ही है, जिसका इस्तेमाल वे तिब्बत के संवेदनशील इलाकों में पहाड़ काटने और ब्लास्टिंग के लिए कर रहे हैं. इस तबाही की जांच होनी चाहिए और इसके लिए पूरी तरह चीन जिम्मेदार है.

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पहाड़ों को क्यों छलनी कर रहा ड्रैगन?

विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन अपने कब्जे वाले तिब्बत में नेपाल सीमा के करीब बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चला रहा है. पहाड़ों और ग्लेशियरों को डायनामाइट से उड़ाकर चीन ‘शियाओकांग’ (Xiaokang) मॉडल बस्तियां और गाइरोंग (Girong) शहर बसा रहा है. संवेदनशील हिमालयी चोटियों को काटकर किए जा रहे इन धमाकों से न सिर्फ पहाड़ कमजोर हो रहे हैं बल्कि वहां इस्तेमाल हो रहा बारूद और मलबा नदियों के जरिए नेपाल के बेकसूर नागरिकों की जान ले रहा है.

नदियों का प्राकृतिक रास्ता बदला

नेपाली खोजी पत्रकारों के समूह ‘नेपाल कॉरेस्पोंडेंस’ का आरोप है कि रसुवा में आई अचानक बाढ़ कोई प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि चीन की ‘जानबूझकर की गई पर्यावरणीय तबाही’ है. चीन ने तिब्बत के गाइरोंग शहर को त्रिशूली नदी के स्वाभाविक बहाव के रास्ते पर बसा दिया है.

इतना ही नहीं, रसुवा सीमा पर बना गाइरोंग पोर्ट भी नदियों के संगम पर इस तरह बनाया गया है ताकि पानी का पूरा दबाव और तेज गति सीधे नेपाल के इलाकों की तरफ मुड़ जाए.

-भारत एक्सप्रेस



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