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Turkey Mayor Arrested: इस्तांबुल के मेयर एक्रेम इमामोग्लू भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार, विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतरे

इस्तांबुल के मेयर एक्रेम इमामोग्लू (Ekrem Imamoglu) को 23 मार्च को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलु के अनुसार, उन पर रिश्वत लेने, भ्रष्टाचार करने, धोखाधड़ी, निजी डेटा चुराने और निविदाओं में गड़बड़ी करने जैसे गंभीर आरोप हैं.

Turkey Mayor Arrested: इस्तांबुल के मेयर एक्रेम इमामोग्लू (Ekrem Imamoglu) को 23 मार्च को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलु के अनुसार, उन पर रिश्वत लेने, भ्रष्टाचार करने, धोखाधड़ी, निजी डेटा चुराने और निविदाओं में गड़बड़ी करने जैसे गंभीर आरोप हैं.

मेयर इमामोग्लू को बुधवार से पुलिस हिरासत में रखा गया था, जहां उनसे आतंकवाद और भ्रष्टाचार से जुड़े दो मामलों में पूछताछ हुई. शनिवार शाम को उन्हें भारी पुलिस सुरक्षा के साथ कोर्ट ले जाया गया. उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया.

खबरों के मुताबिक, आतंकवाद के मामले में उन पर कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) की मदद करने का आरोप था, जिसे तुर्की, यूरोपीय संघ और अमेरिका आतंकी संगठन मानते हैं. इस मामले में उन्हें न्यायिक नियंत्रण में रिहा कर दिया गया था.

2028 में एर्दोगन के सामने बन सकते हैं चुनौती

इमामोग्लू 2024 के स्थानीय चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी के उम्मीदवार को हराकर दूसरी बार इस्तांबुल के मेयर बने थे. वह 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (सीएचपी) से उम्मीदवार बनने की तैयारी में थे. रविवार को पार्टी में इसके लिए वोटिंग भी होनी थी.

इसी बीच राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन ने शनिवार को सीएचपी पर हमला बोला और कहा कि यह पार्टी भ्रष्ट लोगों को बचाने का जरिया बन गई है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष देश में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा है. दूसरी ओर, विपक्षी नेता मानते हैं कि इमामोग्लू की गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित है. हालांकि, तुर्की के न्याय मंत्रालय ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह फैसला पूरी तरह कानूनी है और इसमें एर्दोगन का कोई हाथ नहीं है.

इस गिरफ्तारी के बाद तुर्की में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू कर दिए. इस्तांबुल में अधिकारियों ने चार दिन के लिए सभी सभाओं पर रोक लगा दी, जिसे बाद में अंकारा और इज़मिर तक बढ़ा दिया गया. लोग इसे सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाने का मौका मान रहे हैं. यह मामला तुर्की की राजनीति में बड़ा हंगामा मचा सकता है, क्योंकि इमामोग्लू को विपक्ष का मजबूत चेहरा माना जाता है.


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-भारत एक्सप्रेस



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