Global Crisis: ईरान-इजरायल-अमेरिका की जंग के कारण दुनिया में बड़ा संकट पैदा हो गया है. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने से भारत में रसोई गैस (LPG) की सप्लाई पर गहरा असर पड़ा है. लोग सिलेंडर भरवाने के लिए लंबी कतारों में लग रहे हैं, कई ढाबे और रेस्टोरेंट बंद हो गए हैं. लेकिन सवाल यह है कि इतना अहम रास्ता बंद होने के बावजूद पेट्रोल और डीजल पर क्यों कोई खास असर नहीं दिख रहा?
आइए BharatExpress.Com के एक्सप्लेनर में इसकी वजह समझते हैं-
Strait of Hormuz क्या है, क्यों महत्वपूर्ण है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला संकरा समुद्री रास्ता है. दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है. भारत के लिए यह रास्ता बहुत अहम है क्योंकि खाड़ी देशों से आने वाला बड़ा हिस्सा इसी से आता है. ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रही जंग में ईरान ने इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही रोक दी है. इससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. भारत में LPG की कमी इसी वजह से सबसे पहले दिखी.

LPG पर क्यों सबसे ज्यादा असर पड़ा?
भारत हर साल 31 मिलियन टन से ज्यादा LPG इस्तेमाल करता है. इसमें से घरेलू उत्पादन सिर्फ 40% के आसपास है. बाकी 60% से ज्यादा आयात करना पड़ता है. इनमें से 85-90% LPG खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, कतर, UAE और कुवैत से आता है, जो होर्मुज से होकर गुजरता है.
जब यह रास्ता बंद हुआ तो LPG के टैंकर फंस गए. भारत में LPG का भंडारण भी बहुत कम है. सिर्फ 1-2 दिनों की खपत का स्टॉक रखा जाता है. घरेलू मांग इतनी ज्यादा है कि उज्ज्वला योजना से कनेक्शन 33 करोड़ से ज्यादा हो गए हैं. इसलिए कमी जल्दी महसूस हुई. पैनिक बाइंग से स्थिति और बिगड़ गई. सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी और कमर्शियल सिलेंडर की बिक्री रोक दी.

पेट्रोल-डीजल पर असर क्यों नहीं?
पेट्रोल और डीजल कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) से बनते हैं. भारत कच्चा तेल 40 से ज्यादा देशों से आयात करता है. रूस अब सबसे बड़ा सप्लायर है. पिछले सालों में भारत ने होर्मुज पर निर्भरता कम की है. अब 70% कच्चा तेल होर्मुज के बाहर के रास्तों से आता है. रूस से आने वाला तेल अलग रास्ते से आता है.
भारत के पास स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम स्टोर हैं. विशाखापत्तनम, मंगलौर और पादुर में बड़े भंडार हैं, जो कई हफ्तों की जरूरत पूरी कर सकते हैं. रिफाइनरियों की क्षमता ज्यादा है. वे कच्चे तेल से पेट्रोल-डीजल आसानी से बना लेती हैं. इसलिए अभी पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं है और कीमतें भी स्थिर हैं.

सरकार क्या कर रही है संकट से निपटने के लिए?
सरकार ने रिफाइनरियों को ज्यादा LPG निकालने के निर्देश दिए हैं. कुछ पेट्रोकेमिकल स्ट्रीम को LPG बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. अमेरिका, कनाडा, नॉर्वे जैसे नए स्रोतों से LPG मंगाई जा रही है. ईरान से बातचीत कर कुछ भारतीय टैंकरों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत मिली है. घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया गया है. पेट्रोलियम मंत्री ने संसद में कहा कि पेट्रोल-डीजल पूरी तरह सुरक्षित है. LPG के लिए घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है.
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क्या सीख मिलती है इस संकट से?
यह घटना बताती है कि वैश्विक भू-राजनीति कैसे आम आदमी की रसोई तक पहुंच सकती है. भारत को ऊर्जा आयात में विविधता बढ़ानी चाहिए. ज्यादा भंडारण सुविधाएं बनानी चाहिए. वैकल्पिक रास्तों और स्रोतों पर ध्यान देना जरूरी है. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लंबे समय तक जंग चली तो चुनौतियां बढ़ सकती हैं.
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