रोहिणी कोर्ट ने वर्ष 2020 में अपनी नाबालिग बहन को गर्भवती करने के जुर्म में उसके भाई को 20 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रोहित गुलिया ने 24 वर्षीय युवक को दुष्कर्म करने का दोषी ठहराया था. उन्होंने कहा कि दुष्कर्म के समय पीड़िता की उम्र लगभग 15 साल थी. दोषी के कृत्य के कारण वह गर्भवती हो गई. उससे उसे बहुत अधिक भावनात्मक व शारीरिक आधात सहना पड़ा है.
पीड़िता को मुआवजे के रूप में 13.50 लाख रुपए दिए गए. विशेष लोक अभियोजक चंदर जीत यादव ने दोषी को अधिकतम सजा दिए जाने की मांग की थी और कहा था कि यह एक जघन्य अपराध है.
अदालत ने पिछले वर्ष दिसंबर में पाया था कि आरोपी का डीएनए पीड़िता के भ्रूण से मेल खाता है. पीड़िता ने शुरू में इस बात की शिकायत की थी, लेकिन बाद में अपने भाई को बचाने के लिए अपने बयान से पलट गई थी. उसके बावजूद युवक को दोषी ठहराया गया था. अदालत ने 17 जनवरी को दोषी को यौन अपराध से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धारा 6 (गंभीर यौन उत्पीड़न) के तहत 20 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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