सुप्रीम कोर्ट ने मैनुअल सीवर सफाई और मैला ढोने की प्रथा को लेकर दिल्ली, कोलकाता और हैदराबाद के अधिकारियों द्वारा दिए गए जवाब पर नाखुसी जाहिर की है. कोर्ट ने अधिकारियों से पिछली सुनवाई में पूछा था कि मैनुअल सीवर सफाई और मैला ढोने की प्रथा पर कैसे रोक लगाएंगे. कोर्ट ने अगली सुनवाई में कोलकाता नगर निगम के नगर आयुक्त, दिल्ली जल बोर्ड के निदेशक और हैदराबाद मेट्रोपोलिटन वाटर एंड सीवरेज बोर्ड के प्रबंध निदेशक को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है.
20 मार्च को होगी अगली सुनवाई
जस्टिस सुधांशु धुलिया और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ 20 मार्च को मामले में अगली सुनवाई करेगी. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि कोलकाता नगर निगम के नगर आयुक्त, दिल्ली जल बोर्ड के निदेशक और हैदराबाद मेट्रोपोलिटन वाटर एंड सीवरेज बोर्ड के प्रबंध निदेशक ने यह नही बताया था कि उनके शहरों में मैनुअल सीवर सफाई और मैला ढोने से कुछ लोगों की मौत हुई है. कोर्ट ने इन तीनों राज्यों द्वारा दिए गए हलफनामे पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हलफनामा संतोष जनक नही है.
कोर्ट ने दिया था ये निर्देश
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार को मैनुअल सीवर सफाई को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह से खत्म करने के लिए अपने निर्देश का अनुपालन कर कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने एएसजी ऐश्वर्या भाटी से कहा था कि वे सभी हितधारकों के साथ केंद्रीय निगरानी समिति की बैठक बुलाए. ये समिति हाथ से मैला ढोने वाले प्रथा को बंद करने और उनके पुनर्वास अधिनियम 2013 के कार्यान्वयन की समीक्षा करती है.
टैंक की सफाई के कारण 40 लोगों की हो चुकी है मौत
एमिकस क्यूरी वरिष्ठ वकील परमेश्वर ने कोर्ट को बताया था कि 2024 में सीवर सफाई और सेफ्टिक टैंक की सफाई के कारण 40 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन एफआईआर तक दर्ज नही किया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में केंद्र सरकार और देश के सभी राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेशों को उचित उपाय करने, नीतियां बनाने और निर्देश जारी करने का निर्देश दिया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मैनुअल सीवर सफाई को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह से समाप्त किया जा सके.
-भारत एक्सप्रेस
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