सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखे सीजेआई के पत्र और इन-हाउस कमेटी की रिपोर्ट की प्रतियों की मांग को लेकर दायर आरटीआई आवेदन को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने अमृतपाल सिंह खालसा की ओर से दायर आरटीआई आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया, कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया बनाम सुभाष चंद्र अग्रवाल में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए जानकारी को साझा नही किया जा सकता है.
आरटीआई अधिनियम की धाराओं के तहत दिया गया संदर्भ
यह फैसला आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) (ई) और 11(1) का भी संदर्भ दिया गया. नवंबर 2019 के फैसले में न्यायपालिका की स्वतंत्रता, आनुपतिकता परीक्षण, प्रत्ययी संबंध, निजता के अधिकार पर आक्रमण और गोपनीयता के कर्तव्य का उल्लंघन आदि को आरटीआई अधिनियम 2005 की धारा 8 (1) (ई) और 11(1) के प्रावधानों के संदर्भ में परिभाषित किया गया है.
जस्टिस अभय एस ओका ने सुनवाई से किया था इनकार
इससे पहले दायर याचिका पर जस्टिस अभय एस ओका ने सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था कि भारत के मुख्य न्यायाधीश ने पहले ही इन-हाउस जांच कमेटी की रिपोर्ट और जस्टिस वर्मा का जवाब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज दिया है. बेंच ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने कार्रवाई की मांग करते हुए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के सामने कोई भी प्रतिवेदन दायर नहीं किया है, इसलिए परमादेश की मांग करने वाली रिट याचिका पर विचार करने का कोई मतलब नहीं है.
कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के पास भेजा
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित इन-हाउस कमेटी में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी एस संधावालिया और कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस अनु शिवरामन शामिल थी. कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद सीजेआई ने इसे प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के पास भेज दिया है.
-भारत एक्सप्रेस
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