दिल्ली हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में एक अलग तरह का निर्णय देते हुए आरोपी को जेल नहीं, बल्कि समाजसेवा की सजा सुनाई है. जस्टिस संजीव नरूला ने इस मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए आरोपी को लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल में एक महीने तक सेवा करने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही, सेना कल्याण कोष में 50 हजार रुपये का दान देने का आदेश भी दिया गया है.
ब्लैकमेलिंग और धमकी का मामला
यह मामला 2017-18 का है, जब एक कॉलेज छात्र पर आरोप लगा था कि उसने एक नाबालिग छात्रा से निजी तस्वीरें लेकर उसे ब्लैकमेल किया. आरोपी ने पीड़िता को धमकी दी कि यदि उसने पैसे नहीं दिए तो वह तस्वीरें वायरल कर देगा. उस समय दोनों रिलेशनशिप में थे और आरोपी छात्र, पीड़िता से सीनियर था.
रिश्ते में रहने के दौरान ली तस्वीरें
छात्रा ने बताया कि आरोपी ने यह कहकर तस्वीरें ली थीं कि “रिश्तों में ऐसा आम होता है”. दोनों कुछ समय तक रिश्ते में रहे, लेकिन बाद में आपसी मतभेद के चलते उनका संपर्क टूट गया.
पीड़िता और मां की अपील पर कोर्ट का निर्णय
कोर्ट ने पीड़िता और उसकी मां की बातों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया। पीड़िता ने कहा कि वह अब विवाह की सोच रही है और मुकदमे की वजह से उसकी व्यक्तिगत छवि पर असर पड़ रहा है. मां ने भी कहा कि मामला लंबा चलने से लड़की के लिए अच्छा रिश्ता ढूंढ़ना मुश्किल हो रहा है.
कोर्ट ने क्यों हटाई एफआईआर
जस्टिस नरूला ने माना कि ऐसे मामलों में एफआईआर रद्द करना आम बात नहीं होती. लेकिन यहां पीड़िता की निजता, सामाजिक छवि और भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह विशेष आदेश दिया गया. कोर्ट ने आरोपी को चेतावनी देते हुए समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर दिया है.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

