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ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी एप्लिकेशनों को प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर सभी राज्यों और ईडी को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने सभी राज्यों, ईडी और ऐप कंपनियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है.

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी एप्लिकेशनों को प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को अगली सुनवाई में कोर्ट में मौजूद रहने को कहा है. जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी राज्यों, ईडी और सभी गेम्स ऐप्स को को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है. कोर्ट 18 अगस्त को इस मामले में अगली सुनवाई करेगी.

सिर्फ कानून से नहीं रुकेगी समाज की यह विकृति- कोर्ट

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था, क्या किया जा सकता है? सैद्धांतिक रूप से हम आपके साथ हैं कि इसे रोका जाना चाहिए, लेकिन शायद आप इस गलतफहमी में हैं कि इसे कानून के जरिए रोका जा सकता है. यह याचिका ईसाई धर्म प्रचारक के. ए. पॉल ने दाखिल की है.

पिछली सुनवाई में उन्होंने कहा था कि, मैं उन लाखों माता-पिताओं की ओर से आया हूं जिनके बच्चों ने पिछले कुछ वर्षों में जान गंवाई है. तेलंगाना में ही 1023 से अधिक लोगों ने आत्महत्या की है, क्योंकि 25 बॉलीवुड और टॉलीवुड अभिनेता, इन्फ्लूएंसर मासूमों की जिंदगी से खेल रहे है.

याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया था कि इस मामले में तेलंगाना में एफआईआर दर्ज की गई है, क्योंकि यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. इसपर कोर्ट ने कहा था कि यह समाज की एक विकृति है और केवल कानून बनाकर इसे पूरी तरह रोका नहीं जा सकता. उन्होंने कहा था कि देश की 90 करोड़ आबादी में से करीब 30 करोड़ लोग ऐसे एप्स की गिरफ्त में हैं और यह अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है.


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भारत एक्सप्रेस



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