दिल्ली हाईकोर्ट से अलग रह रहे 70 वर्षीय पति द्वारा पत्नी को भरण पोषण देने से संबंधित मामले में राहत मिल गई है. कोर्ट ने पति से अलग रह रही पत्नी की याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहने के कारण एक महिला को हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत अंतरिम भरण पोषण देने के आदेश देने की मांग कर रही थी.
हाईकोर्ट ने पत्नी को अंतरिम भरण-पोषण देने से किया इनकार
जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैधनाथन शंकर की पीठ पर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पति पर अंतरिम भरण-पोषण देने का दायित्व नहीं डाला जाना चाहिए, जबकि उसकी आर्थिक स्थिति, शारीरिक स्थितिऔर भावनात्मक स्थिति तनाव पूर्ण है. महिला लगभग 30 सालों से अलग रह रही हैं. पारिवारिक अदालत ने इस प्रावधान का लाभ देने से इनकार कर दिया था, उसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी.
पति ने कोर्ट से कहा था कि उसकी पत्नी एक उच्च योग्यता प्राप्त महिला है और जुलाई 2014 में वरिष्ठ शिक्षिका के पद से सेवानिवृत्त हुई है. वह अपने दो वयस्क बेटों के साथ रह रही है. दोनों ही नौकरी पेशा है और अच्छी कमाई कर रहे है. वे उसे आर्थिक रूप से सहारा देने की स्थिति में है. कोर्ट ने कहा कि पति वृद्ध है, और किसी भी नौकरी के लिए अयोग्य है.
उसे अपनी पिछली नौकरी में सभी सेवानिवृति लाभों से वंचित रखा गया था. उसे अपने बुनियादी जीवन-यापन के खतरे को पूरा करने के लिए भारी रकम उधार लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है. इन परिस्थितियों में वह उसकी वित्तीय कमजोरी, उसकी वृद्धावस्था और सेवानिवृति के बाद के अधिकारों के नुकसान के कारण उसपर कोई और आर्थिक दायित्व थोपने के खिलाफ है.
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-भारत एक्सप्रेस
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