सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए याचिका का निपटारा कर दिया है. जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस कोटिश्वर सिंह की पीठ पर मेधा पाटकर पर लगाए गए एक लाख रुपए के जुर्माने को रद्द कर दिया है.
निचली अदालत ने मेधा पाटकर को प्रोबेशन लागू करके जेल की सजा से छूट दी थी. जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने संशोधन कर दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान मेधा पाटकर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय पारीख ने कहा कि अपीलीय अदालत ने दो प्रमुख गवाहों पर विश्वास नही किया था. मेधा पाटकर ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती है.
हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा जाए.पाटकर ने दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना द्वारा 2001 में दर्ज किए गए आपराधिक मानहानि मामले में दोषी ठहराए जाने के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.
मेधा पाटकर को हाईकोर्ट से मिली थी राहत
जस्टिस शालिंदर कौर की बेंच ने यह फैसला दिया था. सक्सेना ने यह मामला 23 साल पहले दाखिल किया था जब वह गुजरात में एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के प्रमुख थे. नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़ी 70-वर्षीय पाटकर ने सत्र अदालत के दो अप्रैल के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है.
सत्र अदालत ने मजिस्ट्रेट की अदालत की ओर से उन्हें दी गई सजा को बरकरार रखा था. मजिस्ट्रेट ने 1 जुलाई, 2024 को पाटकर को आईपीसी की धारा 500 (मानहानि) के तहत दोषी करार देते हुए पांच महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी और उन पर 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था.
साकेत कोर्ट ने पाटकर को 8 अप्रैल को 25 हजार रुपए का परिवीक्षा बांड भरने पर अच्छे आचरण की परिवीक्षा पर रिहा कर दिया था और उन पर एक लाख रुपए का जुर्माना भरने की पूर्व शर्त भी लागू की थी. हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश में पाटकर की सजा को निलंबित कर दिया था और उन्हें 25 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दे दी थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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