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हिंदू उत्तराधिकार संशोधन कानून 2005 के तहत बौद्ध, जैन और सिख बच्चों को पिता की संपत्ति में मिलेगा समान अधिकार

हिंदू उत्तराधिकार संशोधन कानून 2005 के तहत पिता की संपत्ति में सभी बच्चे बेटा हो या बेटी को समान अधिकार दिया गया है. हिंदू महिलाओं की तरह मुस्लिम, ईसाई, यहूदी और पारसी महिलाओं को विरासत में कितना हिस्सा मिलेगा.

Edited by Vaibhav Gupta

हिंदू उत्तराधिकार संशोधन कानून 2005 के तहत पिता की संपत्ति में सभी बच्चे बेटा हो या बेटी को समान अधिकार दिया गया है. हिंदू महिलाओं की तरह मुस्लिम, ईसाई, यहूदी और पारसी महिलाओं को विरासत में कितना हिस्सा मिलेगा, वो उनके धर्म के अनुसार अलग-अलग होता है.

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 में जैन, सिख और बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए उत्तराधिकार और विरासत के अधिकार शामिल हैं. इस अधिनियम के तहत लैंगिक भेदभाव करने के लिए वर्ष 2005 में संशोधन किया गया था. हिंदू, जैन, बौद्ध और सिख धर्म के लोगों पर हिंदी उतराधिकार कानून लागू होता है.

कानून लिंग के आधार पर नहीं करता अंतर

इस कानून के तहत एक बच्चा जन्म के साथ ही परिवार की संपत्ति में हिस्सेदार बन जाता है. कानून हिस्सेदारी में लिंग के आधार पर अंतर नहीं करता है यानी लड़का और लड़कीं दोनों संपत्ति में बराबर के हिस्सेदार माने जाते हैं.

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मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि हिंदू समाज की जो संरचना पहले से मौजूद है, उसे कमतर मत कीजिए. उन्होंने कहा कि एक अदालत के रूप में हम आपको सावधान कर रहें हैं, ये एक हिंदू सामाजिक संरचना है और आप इसे गिरा नहीं सकते. हम नही चाहते कि हमारा फैसला किसी ऐसी चीज को नष्ट दे जो हजारों सालों से चल रही है.

सामाजिक ढांचे व महिलाओं के अधिकार में हो संतुलन

कोर्ट ने कहा कि महिलाओं के अधिकार जरूरी हैं, लेकिन सामाजिक ढांचे और महिलाओं को अधिकार देने के बीच एक संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है. कानून के जानकार और सुप्रीम कोर्ट के वकील एम एल लाहोटी ने जस्टिस नागरत्ना के आदेश का समर्थन किया है.

उन्होंने आगे कहा कि संरचना बर्बाद न हो इसके लिए कानून का अनदेखी की जा सकती है. बता दें कि हिंदू उत्तराधिकार कानून 1956 से अस्तित्व में है, जिसे 2005 में संशोधन किया गया था. चूंकि 2005 के संशोधन कानून में कहा गया था कि इसके लागू होने से पहले पिता की मौत हो जाए तो बेटी का संपत्ति में अधिकार खत्म हो जाता है, यानी अगर पिता संशोधित कानून लागू होने की तारीख 9 सितंबर 2005 को जिंदा नहीं थे तो बेटी उनके पैतृक संपत्ति में हिस्सा नहीं मांग सकती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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