सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सैनिकों के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत बरकरार रखेगा. कोर्ट राहुल गांधी की ओर से दायर याचिका पर चार सप्ताह बाद सुनवाई करेगा. जस्टिस एम. एम सुंदरेश और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने सुनवाई को टाल दिया है. कोर्ट ने निचली अदालत में चल रही कार्रवाई पर रोक लगा रखा है.
संसद में सवाल क्यों नहीं पूछते?
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि आपको कैसे पता चला कि चीन ने 2000 वर्ग किलोमीटर कब कब्जा कर लिया? विश्वसनीयता जानकारी क्या है? एक सच्चा भारतीय ऐसा नहीं कहेगा. जब सीमा पार कोई विवाद हो तो क्या आप ये सब कह सकते? आप संसद में सवाल क्यों नहीं पूछते? हालही में इस मामले में लखनऊ की एमपी/एमएलए कोर्ट से राहुल गांधी को जमानत मिल गई है.
सीमा सड़क संगठन के सेवानिवृत्त निदेशक उदय शंकर श्रीवास्तव ने कोर्ट के समक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि याचिका दायर कर बताया था कि 16 दिसंबर 2022 को राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ों यात्रा के दौरान विभिन्न मीडिया कर्मियों और जनसमूह को संबोधित करते हुए 9 दिसंबर को अरुणांचल प्रदेश की सीमा पर भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच हुई झड़प का जिक्र किया था.
झूठे बयान से परिवादी को आघात
राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि लोग भारत जोड़ों यात्रा के बारे में क्या क्या पूछेंगे, लेकिन चीनी सैनिकों द्वारा हमारे सैनिकों की पिटाई के बारे में एक बार भी सवाल नही पूछेंगे. इसको लेकर भारतीय सेना ने 12 दिसंबर को बयान जारी कर साफ किया था कि चीनी सेना ने भारतीय सीमा में घुसपैठ की कोशिश की थी, जिसका भारतीय सेना ने पूरी मजबूती से जवाब दिया. इसके बाद चीनी सैनिक वापस लौट गए और झड़प में दोनों पक्षों को हल्की चोटें आई.
उदय शंकर ने आरोप लगाते हुए कहा था कि राहुल गांधी द्वारा दिए गए झूठे बयान से उनको तथा अन्य भारतीय सैनिकों द्वारा पिटाई के झूठे बयान से परिवादी को आघात लगा है और लोग वादी के ऊपर भारतीय सेना को लेकर कटाक्ष करते है. उदय शंकर श्रीवास्तव ने अपने अधिवक्ता विवेक तिवारी के जरिए राहुल गांधी के विरुद्ध परिवाद दाखिल किया था. जिसपर सुनवाई के बाद अदालत ने 11 फरवरी 2025 को राहुल गांधी को बतौर आरोपी अदालत में तलब किया था.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

