नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा वोट चोरी को लेकर लगाए गए आरोपों की एसआईटी जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता को चुनाव आयोग के पास जाने को कहा है.
मतदाता सूची में हेराफेरी
कोर्ट ने कहा कि चार सप्ताह में चुनाव आयोग को ज्ञापन सौपें. हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि चुनाव आयोग के पास ज्ञापन दिया गया, लेकिन आयोग ने कोई एक्शन नहीं लिया. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील रोहित पांडेय ने दायर की थी.
दायर याचिका में 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान बेंगलुरु सेंट्रल निर्वाचन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में हेराफेरी के संबंध में लगाए गए आरोपों की सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एसआईटी गठित कर जांच की मांग की गई थी. याचिका में आग्रह किया गया था कि कोर्ट के निर्देशों एवं स्वतंत्र ऑडिट के पूरा होने तक मतदाता सूची के किसी भी प्रकार के आगे के संशोधन या फाइनलाइजेशन पर रोक लगाए जाने की मांग की गई थी.
जवाबदेही व ईमानदारी हो सुनिश्चित
दायर याचिका में यह भी मांग की गई थी कि निर्वाचन आयोग ऐसे बाध्यकारी दिशा निर्देश जारी करें जो मतदाता सूचियों की तैयारी, रखरखाव और प्रकाशन में प्रदर्शित, जवाबदेही और ईमानदारी सुनिश्चित करें. उन्होंने मांग की थी कि इसमें डुप्लीकेट या फर्जी नाम का पता लगाने और उनका रोकथाम की व्यवस्था हो. साथ ही यह भी मांग की गई है कि वह मतदाता सूचियों को सुलभ, मशीन पठनीय और ओसीआर के अनुरूप प्रकाशित करें, ताकि सही तरीके से सत्यापन और सार्वजनिक जांच संभव हो सके. उन्होंने कहा था कि मतदाता सूची में सिर्फ योग्य मतदाता ही होने चाहिए, लेकिन इसमें गड़बड़ी की जा रही हैं.
याचिका में आगे कहा गया था कि यह कार्यवाही संविधान के कई मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. जिनमें अनुच्छेद 324 (निर्वाचन आयोग की देख रेख), अनुच्छेद 326 (सर्वमान्य वोट का अधिकार), अनुच्छेद 324 तथा अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन शामिल हैं. जो समानता या लोकतांत्रिक भागीदारी के अधिकारों की रक्षा करता हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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