अशोक चक्र से सम्मानित शहीद मेजर मोहित शर्मा के माता-पिता ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया हैं. दायर याचिका में फिल्म धुरंधर की रिलीज पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है. दायर याचिका में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन, भारतीय सेना और फिल्म के निर्माता और निदेशक को पार्टी बनाया गया है.
न परिवार से अनुमति, न कोई सहमति पत्र
परिवार वालो का कहना है कि फिल्म की कहानी स्पष्ट रूप से उनके शहीद बेटे के जीवन से प्रेरित प्रतीत होती है, इसके बावजूद न तो परिवार से अनुमति ली गई और न ही कोई सहमति पत्र प्राप्त किया गया. शहीद सैन्य अधिकारी के परिवार ने कोर्ट से मांग की है कि सैन्य अधिकारी के जीवन और पहचान को व्यावसायिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नही किया जा सकता.
दायर याचिका में कहा गया है कि ट्रेलर और प्रचार सामग्री से ऐसा प्रतीक होता है कि फिल्म की कथा वस्तु मेजर मोहित शर्मा के वास्तविक जीवन, उनके सैन्य अभियानों और वीरता से मेल खाती है, जो उनके व्यक्तिगत अधिकारों, व्यक्तित्व अधिकार तथा शाहिद की गरिमा का उल्लंघन है.
जनता के बीच गलत जानकारी पहुंचने का खतरा
याचिका में यह भी कहा गया है कि बिना अनुमति इस प्रकार की कहानी पेश किए जाने से जनता के बीच शहीद अधिकारी के बारे में गलत या अपूर्ण जानकारी पहुचने का खतरा है. इसलिए फिल्म की रिलीज, प्रसारण या डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्धता पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है.
हरियाणा के रोहतक में जन्मे मेजर मोहित शर्मा एनडीए और आईएमए से ग्रेजुएट थे. अत्यधिक साहस, निडरता और नेतृत्व क्षमता के लिए जाने जाते थे. उन्होंने 2004 में दक्षिण कश्मीर के शोपियां में इफ्तिखार भट्ट नाम से हिजबुल मुजाहिदीन में घुसपैठ कर उनकी कमर तोड़ दी थी और बाद में शहीद हो गए थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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