कैंसर को देशव्यापी अधिसूचित बीमारी घोषित करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, देश के सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह नोटिस जारी किया है.
मरीजों का हो सके बेहतर उपचार
यह याचिका एम्स के सेवानिवृत्त कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर अनुराग श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट के वकील गौरव बंसल के माध्यम से दायर की है. याचिका में कैंसर की समय पर पहचान, अनिवार्य रिपोर्टिंग और मरीजों को बेहतर उपचार सुनिश्चित करने की मांग की गई है. याचिका में केंद्र के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को निर्देश देने की मांग की गई है. कैंसर को अधिसूचित बीमारी घोषित किया जाए, ताकि पूरे देश में कैंसर के मामलों की एक समान और अनिवार्य रिपोटिंग हो सके.
17 राज्यों में Cancer एक अधिसूचित बीमारी
दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि कैंसर को अधिसूचित न करना उसकी बढ़ती गंभीरता के बावजूद, संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 के तहत राज्य के संवैधानिक दायित्यों को गंभीर उल्लंधन है. इससे समान परिस्थितियों में रहने वाले नागरिकों के साथ भेदभाव किया जाता है. जिससे उनके स्वास्थ्य और गरिमापूर्ण जीवन के मौलिक अधिकार को नुकसान पहुचता है. फिलहाल देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से केवल 17 ने ही अपने सार्वजनिक स्वास्थ्य कानूनों के तहत कैंसर को अधिसूचित बीमारी घोषित किया है.
इलाज को लेकर फैल रही गलत जानकारी
दायर याचिका में कैंसर के इलाज को लेकर फैल रही खतरनाक गलत जानकारियों पर चिंता जताई गई है. इसमें गौमूत्र जैसे अवैज्ञानिक उपचारों को कैंसर के इलाज के रूप में प्रचारित किए जाने का जिक्र किया गया है. दायर याचिका में यह भी दावा किया गया है कि भारत की 90 फीसदी आबादी वर्तमान में व्यवस्थित कैंसर निगरानी से बाहर है.
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-भारत एक्सप्रेस
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