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दिल्ली हाई कोर्ट ने पतंजलि के गोनाइल ट्रेडमार्क को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद के ‘गोनाइल’ ट्रेडमार्क को रद्द करने वाली याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने कहा कि पतंजलि के ब्रांड नाम से उपभोक्ताओं में कोई भ्रम पैदा नहीं होता. विस्तार से पढ़ें कोर्ट का फैसला.

Delhi High Court, Patanjali Ayurved, Legal News
Edited by Radha Priya

Patanjali Gonyle Case: दिल्ली हाईकोर्ट से पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के पतंजलि गोनाइल फ्लोर क्लीनर ट्रेडमार्क को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है.

यह याचिका होली काऊ फाउंडेशन नामक एनजीओ की ओर से दायर याचिका को दायर की गई थी. जस्टिस तेजस कारिया ने ट्रेड मार्क्स एक्ट 1999 की धारा 57 के तहत दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने यह साबित करने में विफल रहा कि पतंजलि के ब्रांड से उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा होगा.

“उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति नहीं”

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि जब विवादित मार्क को उसके प्रमुख पतंजलि हाउस मार्क के साथ समग्र रूप से देखा जाता है, तो वह याचिकाकर्ता के मार्क से न तो समान है और न ही भ्रामक रूप से मिलता-जुलता है, जिससे औसत बुद्धि और अपूर्ण स्मृति वाले उपभोक्ताओं में भ्रम या धोखा पैदा हो. इसलिए धारा 57, 9 (2)(a) और 11 (1)(a) के तहत रजिस्टर में संशोधन का कोई आधार नहीं बनता.

होली काऊ फाउंडेशन का दावा था कि वह 2013 से गोमूत्र आधारित फ्लोर क्लीनर के लिए गौंयले नाम का पहले से उपयोग कर रही है और पतंजलि का Gonyle नाम उससे ध्वन्यात्मक और दृश्य रूप से मिलता-जुलता है, जिसे बुरी नीयत से अपनाया गया है.

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दस्तावेजों की प्रमाणिकता पर सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान पतंजलि की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि वह इस नाम का उपयोग 2008 से कर रही है और उसके उत्पादों पर प्रमुख रूप से लिखा है पतंजलि एक प्रसिद्ध हाउस मार्क है. जो उसे पहचान देता है. इतना ही नही कंपनी की ओर से पेश वकील ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए दस्तवेज़ों कि प्रमाणिकता पर सवाल उठाते हुए याचिका को खारिज करने की मांग की जिसके बाद कोर्ट ने सभी पक्षों की जिरह सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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