सुप्रीम कोर्ट ने संसद, सरकारी ऑफिस और अन्य सार्वजनिक स्थानों से हिंदुत्व विचारक वीर सावरकर की तस्वीरों को हटाने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि इस तरह की याचिका अदालत का समय बर्बाद करती है.
यह याचिका पूर्व आईआरएस अधिकारी बी. बालमुरुगन ने दायर की थी. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से याचिका को वापस लेने के लिए कहा. कोर्ट ने कहा कि याचिका पर अगर आगे कोर्ट सुनवाई करता है तो वह याचिकाकर्ता पर भारी जुर्माना लगाए गा. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से एक लाख रुपए जमा करने के बाद ही सुनवाई की बात कही है. जिसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका को वापस ले लिया है.
समाज में योगदान की दी सलाह
मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता की सेवा-यात्रा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि उन्होंने आखिरी पोस्टिंग क्या थी और उन्हें प्रमोशन क्यों नही मिला. कोर्ट ने जानना चाहा कि क्या उनपर कोई भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. इसपर याचिकाकर्ता बालमुरुगन ने कहा कि उन पर कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं है, लेकिन 2009 में श्रीलंका में शांति के समर्थन में भूख हड़ताल करने के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई हुई थी. इसपर सीजेआई ने कहा कि इस तरह की तुच्छ याचिकाएं आपकी सोच को दिखाता है. कृपया इन सबमें न पड़ें, अपनी सेवानिवृति का आनंद लें और समाज में कोई सकारात्मक भूमिका निभाए.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सवाल
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट नही आने पर भी सवाल किया. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए, जबकि एक पूर्व आईआरएस होने के नाते दिल्ली आ सकते थे. दायर याचिका में कहा गया था कि संसद के सेंट्रल हॉल और अन्य सार्वजनिक स्थानों से सावरकर की तस्वीर हटाने के साथ-साथ ऐसे व्यक्तियों को सम्मान देने से रोकने की मांग की थी, जिन पर गंभीर अपराधों और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के आरोप रहे हों और जिन्हें सम्मानजनक रूप से बरी नहीं किया गया हो.
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-भारत एक्सप्रेस
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