पश्चिम बंगाल एसआईआर मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के बावजूद पालन नही करने पर नाराजगी जाहिर की है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ मामले में सुनवाई कर रही है. कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया के तहत दावों और आपत्तियों पर निर्णय लेने के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की है.
सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि वे जिला न्यायाधीशों के पद पर कार्यरत और पूर्व न्यायिक अधिकारियों को एसआईआर कर्तव्यों के लिए आरक्षित रखें. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि असाधारण परिस्थितियों के कारण उसे यह असाधारण आदेश पारित करना पड़ा है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि न्यायिक अधिकारियों को कार्यवाही संभालने दीजिए. हम हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करेंगे, हमें उनके अधिकार क्षेत्र का भी सम्मान करना है.
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा सवाल
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कलेक्टर और एसपी समय-समय पर जारी किए जाने वाले निर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्वतः प्रतिनियुक्त माने जा जाएंगे.कोर्ट ने कहा राज्य सरकार द्वारा उनके उनके निर्देशों का तुरंत पालन किया जाना चाहिए. अदालत ने गतिरोध को दूर करने के लिए कल बैठक बुलाने का आदेश दिया है. कार्यवाही का तंत्र हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पर छोड़ दिया गया है. कोर्ट मार्च के पहले सप्ताह में सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि समय सीमा 21 फरवरी तक बढ़ाने के बावजूद 15 फरवरी को ही उन्होंने दस्तावेज अपलोड करना बंद कर दिया था. कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि क्या आपको योग्य अधिकारी मिलें.
इसपर आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील डीएस नायडू ने कहा कि हमने उनसे कहा कि हमें इस प्रकार के अधिकारियों की आवश्यकता नही है. उन्होंने हमें पत्र लिखा है कि ठीक है, आप इंतजार कीजिए. सीजेआई ने कहा कि क्या राज्य सरकार की जिम्मेदारी नहीं है कि आप एआरओ मुहैया कराए. सीजेआई ने कहा कि आप हमें निराश मत कीजिए. ये तो बहुत अजीब बात है.
पश्चिम बंगाल की स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि प्रत्येक राज्य में अलग-अलग व्यवस्था है. सीजेआई ने कहा कि क्या राज्य सरकार की ओर से संचार का यही स्तर है? सीजेआई ने कहा कि हमें बिहार से कोई शिकायत नहीं मिली? सीजेआई ने कहा कि ईआरओ सक्षम प्राधिकारी नहीं होते है. सीजेआई ने कहा कि इस तरह के बयान राज्य में संवैधानिक प्राधिकरण के खिलाफ दिए जा रहें हैं. यह अलार्मिंग है.
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अर्ध-न्यायिक कार्य करने के लिए अधिकारियों की आवश्यकता पड़ती है. आप किसी क्लर्क से यह नही कह सकते कि चलो अब एक लिखित आदेश पारित करों. उन्हें जनता के भाग्य का फैसला करना होता है. सीजेआई ने कहा कि राज्य सिविल सेवाएं इस तरह से काम कर सकती हैं. लेकिन अगर आपके पास पर्याप्त ग्रुप A अधिकारी नहीं है. अपनी सूची देखें, 5 साल बीडीओ के रूप में सेवा दे और फिर उन्हें जिला मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात करें.
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल डीजीपी से एक्शन टेकन रिपोर्ट तलब किया, अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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